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प्रादेशिक

अम्बुबाची मेले का समापन होने के साथ कामाख्या देवी मंदिर के कपाट खुले

गुवाहाटी में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अम्बुबाची मेले का समापन होने के बाद शुक्रवार को देवी के गर्भगृह के मुख्य कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए गए हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
मंदिर में उमड़ी श्रृद्धालुओं की भीड़

मंदिर में उमड़ी श्रृद्धालुओं की भीड़

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गुवाहाटी, असम। नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक कामाख्या मंदिर में चार दिवसीय अम्बुबाची मेले का समापन हो गया है। इस वर्ष अम्बुबाची मेले का समापन होने के साथ ही लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं ने मां कामाख्या के दर्शन किए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी के वार्षिक मासिक धर्म चक्र की अवधि पूरी होने के बाद विशेष अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न किया गया। इस प्रक्रिया के पूरा होने को अम्बुबाची निवृत्ति के रूप में जाना जाता है जिसके बाद मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खोले गए। [1]

इस वर्ष के आंकड़ों के अनुसार इस वार्षिक मेले में कुल सात लाख छियानवे हजार सात सौ सतहत्तर श्रद्धालु शामिल हुए हैं जिनमें पचहत्तर अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री भी थे। कपाट खुलने के साथ ही हजारों की संख्या में भक्त पवित्र अंगवस्त्र और अंगोदक प्राप्त करने के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए जिसे बेहद शुभ माना जाता है। इस चार दिवसीय धार्मिक समागम के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों से भक्तों, साधुओं, तांत्रिकों तथा पर्यटकों का एक अभूतपूर्व आगमन देखने को मिला है।

आंकड़े और श्रद्धा

पर्यटन मंत्री अजंता नियोग के अनुसार यह मेला भारत के सबसे पूजनीय आध्यात्मिक स्थलों में से एक के रूप में स्थापित हुआ है। पिछले वर्ष बयालीस विदेशियों सहित सात लाख बहत्तर हजार उन्नीस लोगों ने इस मेले का दौरा किया था। वहीं वर्ष 2024 में कुल सात लाख छियालीस हजार छियासठ श्रद्धालु यहां आए थे जिनमें बीस लोग विदेशों से शामिल थे। हैदराबाद से आई एक श्रद्धालु रश्मि रेड्डी ने बताया कि मां कामाख्या ने उन्हें नीलाचल पहाड़ियों पर बुलाया था।

उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी लेकिन एक दिव्य शक्ति उन्हें अंदर से बुला रही थी जिसके कारण वह यहां आईं। दोहा कतर से आई उनकी बहन ने कहा कि यह केवल मां कामाख्या की शक्ति ही थी जो उन्हें यहां खींच लाई। वे दोनों एक साथ आईं और तीन दिनों तक गुवाहाटी में रुकीं। मां कामाख्या के दर्शन करना एक महान आशीर्वाद है जो दिव्य अनुभूतियों को लंबे समय तक बनाए रखता है। मंदिर को वार्षिक अनुष्ठान शुरू होने के कारण बाईस जून से ही बंद रखा गया था।

प्रशासनिक व्यवस्था

कामाख्या मंदिर में इस धार्मिक उत्सव के दौरान भक्तों के सुगम आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। पूरे मेला क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं, स्वच्छता के कड़े उपाय, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और यातायात प्रबंधन की सुचारू व्यवस्था की गई थी। इस कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और सभी ने बहुत ही सुगमता से अपनी धार्मिक यात्रा को पूरा किया।

अक्सर पूर्व के महाकुंभ के रूप में वर्णित यह मेला शक्ति की उपासना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है। तंत्र साधना की परंपराओं में इस उत्सव का बहुत अधिक महत्व है जो दुनिया भर के तपस्वियों और आध्यात्मिक साधकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस तरह अम्बुबाची मेले का समापन होने के बाद मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना पूरी तरह से बहाल हो गई है जिसे दिव्य आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक उत्सवों और मेलों के दौरान यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और यातायात नियमों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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