घटिया दवाओं पर कार्रवाई: दवा निर्माण लाइसेंस रद्द होने से मची खलबली
केंद्र सरकार ने गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के चलते जैक्सन लेबोरेटरीज के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसका दवा निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
नई दिल्ली, दिल्ली। केंद्र सरकार ने जैक्सन लेबोरेटरीज के खिलाफ एक बहुत ही सख्त नियामक कार्रवाई शुरू की है। इसके तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और संबंधित राज्य दवा नियामकों द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण के बाद कंपनी की पंजाब और हिमाचल प्रदेश में स्थित इकाइयों के दवा निर्माण लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि यह कार्रवाई राजस्थान की एक हालिया घटना की जांच के बीच की गई है जिसमें मीडिया रिपोर्टों ने कंपनी द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को मातृ मृत्यु से जोड़ा है। [1]
अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दुखद घटना के पीछे के वास्तविक तथ्यों को स्थापित करने के लिए राजस्थान सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्य दवा नियामकों के साथ मिलकर गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज के अनुपालन का आकलन करने के लिए जैक्सन लेबोरेटरीज की विनिर्माण सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया था। इस संयुक्त निरीक्षण दल द्वारा पाई गई गंभीर कमियों और सिफारिशों के आधार पर संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों ने इन इकाइयों के दवा निर्माण लाइसेंस रद्द किए हैं।
सख्त नियामक कार्रवाई
दवा निर्माण लाइसेंस रद्द होने पर मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह हालिया नियामक कार्रवाई दवा क्षेत्र में गुणवत्ता और विनिर्माण मानकों के उल्लंघन के प्रति सरकार के जीरो-टॉलरेंस दृष्टिकोण को पूरी तरह से दर्शाती है। इस पूरे मामले की आगे की गहन जांच अभी भी जारी है। प्रशासन द्वारा इस बात की पुष्टि की गई है कि चल रही जांच के निष्कर्षों और लागू नियामक प्रावधानों के आधार पर भविष्य में कंपनी के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि मानकों की पवित्रता को हर हाल में बनाए रखा जा सके।
"यह संगठन नियमित रूप से राष्ट्रीय नियामक अधिकारियों से जानकारी मांगता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं किसी विशेष स्थान तक ही सीमित हैं या नहीं।" -एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी
इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने राजस्थान की घटना के संबंध में जैक्सन लेबोरेटरीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का जिक्र करने वाली मीडिया रिपोर्टों के बाद भारत सरकार से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह संचार वैश्विक फार्माकोविजिलेंस और नियामक निगरानी तंत्र का एक सामान्य हिस्सा है। इस तरह की प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े संभावित जोखिमों के आकलन के लिए हमेशा अपनाई जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानक प्रक्रिया
मंत्रालय के अधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस अनुरोध को उत्पाद या निर्माता के खिलाफ कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं समझा जाना चाहिए। यह केवल संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों के मूल्यांकन की एक मानक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है। इसके तहत यह जांचा जाता है कि क्या इस तरह की घटनाओं का उन अन्य देशों के लिए भी कोई निहितार्थ हो सकता है जहां इस विशिष्ट उत्पाद को वितरित किया गया हो सकता है।
"मंत्रालय राजस्थान सरकार की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जबकि नियामक अधिकारी इस पूरे मामले की अपनी जांच लगातार जारी रख रहे हैं।" -स्वास्थ्य मंत्रालय अधिकारी
दवा निर्माण लाइसेंस रद्द होने के बाद से देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में नियमों को लेकर कड़ाई बहुत ज्यादा बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय इस संवेदनशील मामले पर पूरी नजर बनाए हुए है ताकि विनिर्माण क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही को तुरंत रोका जा सके। राजस्थान सरकार की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में शामिल अन्य दोषियों की जवाबदेही तय की जाएगी और देश में दवाओं की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। स्वास्थ्य और दवाओं से जुड़े किसी भी गंभीर मामले में केवल प्रमाणित और सरकारी स्वास्थ्य निकायों द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।