लेबनान इज़राइल संघर्ष: शांति समझौता खारिज, दागी मिसाइलें
मध्य पूर्व में लेबनान इज़राइल संघर्ष रोकने का शांति समझौता अब ड्रोन हमलों और बढ़ते सैन्य तनाव के कारण पूरी तरह से खटाई में पड़ गया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
वाशिंगटन, अमेरिका। लेबनान इज़राइल संघर्ष को थामने के उद्देश्य से अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार सुरक्षा समझौते को हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। हस्ताक्षर होने के ठीक 1 दिन बाद शनिवार को इस समझौते को इज़राइल के सामने आत्मसमर्पण बताते हुए उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच युद्धविराम के दावों को धता बताते हुए इज़राइल ने शनिवार को दक्षिणी लेबनान के इलाके में एक बड़ा ड्रोन हमला किया जिसने इस भीषण लेबनान इज़राइल संघर्ष को और अधिक भड़का दिया है। [1]
इस समय जारी भीषण लेबनान इज़राइल संघर्ष के समांतर चल रहे व्यापक युद्ध के कारण अब तक 10 लाख से अधिक लेबनानी नागरिकों को अपने घरों को छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा है। हिज्बुल्लाह और ईरान का दावा है कि वाशिंगटन ने 2 सप्ताह पहले हस्ताक्शरित अपने समझौता ज्ञापन के हिस्से के रूप में लेबनान में शत्रुता समाप्त करने का ठोस वादा किया था। शुक्रवार को तय हुए इस नए ढांचे के तहत दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों से चरणबद्ध तरीके से इजरायली सैनिकों की वापसी और वहां लेबनानी सेना की तैनाती का प्रावधान किया गया था।
शांति समझौते का विरोध
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए सुरक्षा ढांचे के तहत इजरायली सेना को फिलहाल एक विस्तारित सुरक्षा क्षेत्र में बने रहने की अनुमति दी गई है। हिज्बुल्लाह प्रमुख कासिम ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरे समझौते को पूरी तरह शून्य और अमान्य घोषित कर दिया है। उन्होंने लेबनान की सरकार पर एकतरफा रियायतें देने और देश की संप्रभुता को गंभीर नुकसान पहुंचाने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने इस बात की कड़ी आलोचना की कि इजरायली सेना की वापसी को हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण से जोड़ा गया है।
"यह प्रावधान प्रभावी रूप से इज़राइल की सैन्य उपस्थिति को वैध बनाता है और यह सभी तय सीमाओं को पार करने जैसा है।" — नईम कासिम, हिज्बुल्लाह प्रमुख
कासिम ने कहा कि उनका संगठन अपनी सशस्त्र संप्रभावित लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि हमने सबसे कठिन परिस्थितियों में भी युद्ध का मैदान नहीं छोड़ा था और हम इसे आगे भी कभी नहीं छोड़ेंगे। दूसरी तरफ इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने इस रूपरेखा समझौते की सराहना की है क्योंकि यह इज़राइल को सुरक्षा क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखने देता है। इसके कारण इजरायली सेना विस्थापित निवासियों की वापसी को रोकने में सक्षम रहेगी जो लेबनान के नागरिकों में भारी असंतोष पैदा कर रहा है।
असंतोष और सैन्य कार्रवाई
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार को एक भाषण में उन दो पायलट क्षेत्रों का नक्शा दिखाया जिन्हें इज़राइल अंततः लेबनानी सेना को सौंपने पर सहमत हुआ था। इनमें से 1 क्षेत्र पूरी तरह से इजरायली कब्जे वाले इलाके से बाहर था जबकि दूसरा पिछले सप्ताह घोषित विस्तारित कब्जे वाले क्षेत्र के बिल्कुल किनारे पर स्थित था। इसी बीच जमीनी हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और लेबनान की राज्य समाचार एजेंसी ने बताया कि एक इजरायली ड्रोन ने शनिवार को नबातियेह अल-फौका पर हमला कर दिया।
यह क्षेत्र इजरायली सेना द्वारा जारी उस नक्शे के सुरक्षा क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है जिसके नियंत्रण का दावा किया गया था। इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि उसने वहां ड्रोन से हमला किया क्योंकि उस तत्काल क्षेत्र में उसके सैनिक मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि उसने एक ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाया जो उनकी सेना के लिए खतरा था। इज़राइल की सेना ने इस हमले के संबंध में कोई अन्य विस्तृत विवरण या ठोस सबूत पेश नहीं किया है जिससे तनाव बढ़ गया है।
संकट का बढ़ता दायरा
हिज्बुल्लाह प्रमुख कासिम ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में हुए ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन को ही संघर्ष समाप्त करने का मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए क्योंकि वह लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी देता है। शुक्रवार के वाशिंगटन समझौते को उन्होंने पूरी तरह पक्षपाती करार दिया है। इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों में अपने घरों को लौटने में असमर्थ सैकड़ों हजारों लेबनानी शिया मुस्लिमों में भारी आक्रोश है और हालात पूरी तरह अस्थिर बने हुए हैं।
यह गुस्सा केवल हिज्बुल्लाह तक सीमित नहीं है बल्कि लेबनान के सर्वोच्च शिया राजनीतिज्ञ और संसद अध्यक्ष नबीह बेरी के अमल आंदोलन ने भी इस समझौते को पूरी तरह असंतुलित और इजरायल के पक्ष में झुका हुआ बताया है। इस प्रकार लेबनान इज़राइल संघर्ष को शांत करने के तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रयास अब पूरी तरह से विफल होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। इस क्षेत्र के बदलते सैन्य हालात ने अंतरराष्ट्रीय संकट को और अधिक जटिल बना दिया है जिसका सीधा असर वैश्विक सुरक्षा पर पड़ रहा है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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