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दिल्ली

मनोरंजन और तकनीक के संगम से रैम्बो सर्कस का जादू बरकारार

मनोरंजन और तकनीक के संगम से रैम्बो सर्कस का जादू बरकारार है जिसके नए और आधुनिक शो को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
रैम्बो सर्कस का जादू

रैम्बो सर्कस का जादू

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दक्षिण दिल्ली, दिल्ली। 'फेडरेशन मोंडिएल डू विर्क' द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त भारत के एकमात्र रैम्बो सर्कस ने एक बार फिर शानदार वापसी की है। हौज खास क्षेत्र में स्थित एनसीयूआई ऑडिटोरियम में आयोजित चार दिवसीय प्रदर्शनों की श्रृंखला में रैम्बो सर्कस का जादू सर चढ़कर बोल रहा है जिसके चलते दर्शकों का भारी हुजूम उमड़ रहा है। इस दौरान माता-पिता और बच्चे कलाबाज़ी, जुगलबंदी, साइकिलिंग, टाइट्रोप वॉकिंग और लेज़र डांस जैसी अद्भुत प्रस्तुतियों को देखने के लिए ऑडिटोरियम में पहुंच रहे हैं जिससे सभी शो पूरी तरह हाउसफुल चल रहे हैं। [1]

शो के दौरान जोकर रंजीत सदा और राजीव चटर्जी बच्चों को बनी ईयर कैप बांटकर और बबल एक्ट करके उनके साथ सीधा संवाद कर रहे हैं। कलाकारों का कहना है कि सर्कस मूल रूप से कलाकारों और दर्शकों के बीच एक जीवंत संबंध बनाने का माध्यम है। उनके अनुसार बच्चों के चेहरों पर मुस्कान देखना ही उनके इस पूरे प्रदर्शन का सबसे बड़ा और सच्चा पुरस्कार है। रैम्बो सर्कस की स्थापना सर्कस उद्यमी पी टी दिलीप द्वारा की गई थी और इसे आधिकारिक तौर पर 26 जनवरी 1991 को लॉन्च किया गया था।

बदलाव का दौर

सर्कस के शुरुआती वर्षों में हाथी, शेर, बाघ, घोड़े, ऊंट, चिंपैंजी, भालू, तोते और कुत्ते इसका मुख्य हिस्सा हुआ करते थे। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 1998 में सर्कस में जंगली जानवरों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के बाद, कंपनी ने खुद को पूरी तरह से बदला और मानवीय प्रतिभा पर अपना ध्यान केंद्रित किया। आज इसके आधुनिक प्रदर्शनों में हवाई करतब, कलाबाज़ी, जुगलबंदी, संतुलन बनाने के कार्य और एलईडी लेज़र शो जैसे तकनीक आधारित आकर्षण मुख्य रूप से शामिल किए गए हैं।

सबसे लोकप्रिय प्रस्तुतियों में अर्जुन नायक और उनकी पत्नी का बैलेंसिंग बॉक्स एक्ट है। इस एक्ट के दौरान अर्जुन दो बार जानबूझकर असफल होने के बाद स्टंट पूरा करते हैं जो दर्शकों के लिए जबरदस्त रोमांच और सस्पेंस पैदा करता है। कलाकारों के अनुसार यह एक्ट जीवन में दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास का संदेश देता है। सर्कस प्रबंधक गौरव ने बताया कि बढ़ती ईंधन कीमतों, परिवहन लागत, कार्यक्रम स्थल के किराए और कलाकारों के वेतन के कारण आज सर्कस का संचालन करना काफी महंगा हो गया है।

चुनौतियां और मांग

मनोरंजन और तकनीक के संगम से रैम्बो सर्कस का जादू बरकरार रखने के लिए सर्कस ने विश्व स्तरीय हवाई प्रदर्शनों और आधुनिक प्रौद्योगिकी आधारित एक्ट में बड़ा निवेश किया है। लेज़र डांस करने वाले कलाकार लकी राज ने अपने एलईडी कॉस्ट्यूम खुद ही डिज़ाइन किए हैं। दूसरी ओर, 57 वर्षीय जोकर बीजू पुष्करन ने कहा कि कलाकारों को जीवित रखने और भारत की सबसे पुरानी प्रदर्शन कलाओं में से एक को संरक्षित करने के लिए संस्कृति मंत्रालय के तहत इन्हें विशेष पहचान मिलनी चाहिए।

रैम्बो सर्कस अपने सभी कलाकारों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करता है जो भारत के विभिन्न राज्यों से संबंध रखते हैं। सर्कस में पिछले 20 वर्षों से काम कर रही पिंकी ने बताया कि 1998 में जानवरों पर लगे प्रतिबंध के बाद नई विधाएं सीखना बेहद कठिन था, लेकिन अब वे अंतरराष्ट्रीय सर्कसों को देखकर अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार कर रही हैं। मनोरंजन और तकनीक के संगम से रैम्बो सर्कस का जादू बरकारार रखने वाले इन कलाकारों के हौसले की दर्शकों ने सराहना की।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। कला और मनोरंजन क्षेत्र के कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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