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मोटिवेशनल

नेत्रहीन किसान: वह देख नहीं सकता लेकिन अपने हर पौधे को पहचानता है

नेत्रहीन किसान अपनी उंगलियों के स्पर्श से फसलों की सटीक सेहत पहचानकर खेती से शानदार मुनाफा कमा रहा है जिससे पूरे क्षेत्र के लोग प्रेरित हो रहे हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
बसंता गांव के रहने वाले प्रमोद सिंह

बसंता गांव के रहने वाले प्रमोद सिंह

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वैशाली, बिहार। इंसान की सबसे बड़ी सीमाएं उसके शरीर में नहीं बल्कि उसके मन में होती हैं और जब हौसला बुलंद हो तो शारीरिक अक्षमता भी आड़े नहीं आती। जिला मुख्यालय हाजीपुर से करीब चालीस किलोमीटर दूर लालगंज प्रखंड के बसंता गांव के रहने वाले प्रमोद सिंह ने आंखों की रोशनी न होने के बावजूद यह साबित कर दिखाया है। प्रमोद का मानना है कि उनकी दृष्टि उनके दिमाग में सबसे अधिक सक्रिय है और वे अपने अटूट संकल्प से अपने सपनों को हकीकत में बदल रहे हैं। [1]

अपनी शारीरिक दिव्यांगता को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदलकर इस नेत्रहीन किसान ने तरबूज, टमाटर और कई अन्य सब्जियों की खेती में असाधारण सफलता हासिल की है। बरसों के अनुभव और छूने की अद्भुत क्षमता के दम पर वे पूरे खेत का प्रबंधन करते हैं। वे खुद फसलों के चक्र, बीजों के चयन और सिंचाई की व्यवस्था तय करते हैं। वे नियमित रूप से अपने खेतों में घूमते हैं और पौधों की पत्तियों, तनों और मिट्टी को छूकर फसल के स्वास्थ्य का सटीक अंदाजा लगा लेते हैं।

अनोखा हुनर

बीते कई वर्षों के कड़े अभ्यास से प्रमोद सिंह की उंगलियां ही उनकी आंखें बन चुकी हैं। पत्तियों की बनावट और मिट्टी की नमी को केवल महसूस करके वे पूरी फसल की स्थिति का मूल्यांकन कर लेते हैं और इसके बाद कृषि मजदूरों को काम के निर्देश देते हैं। आज एक नेत्रहीन किसान द्वारा अपनाई गई यह अनूठी कृषि पद्धति न केवल वैशाली में बल्कि पूरे बिहार में लोगों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन चुकी है।

आज के समय में जब लोग पारंपरिक खेती को घाटे का सौदा मानकर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, प्रमोद ने आधुनिक सोच से इसे एक फायदे का जरिया बनाया है। खेती से शानदार कमाई सुनिश्चित कर वे अपने परिवार का पूरा खर्च चला रहे हैं और अपने बच्चों को सीबीएसई स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि यदि सही तरीके से काम किया जाए तो कृषि से सरकारी नौकरी से भी अधिक धन अर्जित किया जा सकता है।

कमाई का गणित

इस साल प्रमोद ने दस बीघा जमीन पर तरबूज की खेती की है जिसमें उन्होंने अपनी बचत से करीब पांच लाख रुपये का निवेश किया था। फसल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्हें पूरा भरोसा है कि वे इस निवेश से दोगुनी यानी लगभग दस लाख रुपये तक की शुद्ध बचत के साथ सफल रहेंगे। इस तरह एक नेत्रहीन किसान ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी आर्थिक स्थिति को बहुत मजबूत कर लिया है।

"अगर आप आधुनिक तकनीक का उपयोग करके खेती करते हैं, फसलों की समय पर देखभाल करते हैं और बाजार की मांग को समझते हैं, तो यह दुनिया के सबसे सफल और सम्मानजनक व्यवसायों में से एक बन जाता है। एक किसान को पूरी तरह केंद्रित रहना होगा, अन्यथा फसलें ठीक से नहीं बढ़ेंगी और मुनाफा नहीं होगा।" — प्रमोद सिंह, किसान

सकारात्मक बदलाव

प्रमोद सिंह के इस अटूट जज्बे को देखकर उनके परिवार के सभी सदस्य हर कदम पर उनका पूरा सहयोग करते हैं। उनकी सफलता से प्रभावित होकर क्षेत्र के कई ऐसे लोग जो कृषि कार्य छोड़ चुके थे, अब दोबारा अपने खेतों की तरफ लौट रहे हैं और आधुनिक विधाएं अपना रहे हैं। दूर-दूर से कृषि विशेषज्ञ और आम लोग उनके व्यावसायिक कौशल और प्रबंधन को समझने के लिए बसंता गांव पहुंच रहे हैं।

प्रमोद की यह प्रेरक कहानी याद दिलाती है कि जब इंसान के मन से संदेह और नकारात्मक विचार दूर हो जाते हैं, तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। एक नेत्रहीन किसान का यह सफर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक नई राह दिखा रहा है। दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर कृषि को एक सम्मानजनक और बेहद लाभदायक उद्यम में बदल दिया है।

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत बीजों के चयन से पूर्व स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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