अरुणाचल में चीन सीमा पर अतिक्रमण के गंभीर दावों से बढ़ी चिंता
अरुणाचल प्रदेश के एक स्थानीय संगठन ने चीन सीमा पर अतिक्रमण होने का गंभीर दावा करते हुए जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच करने का आग्रह किया है।
चाइना का मिलट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर होने का दावा
तेजपुर, असम। भारत-चीन सीमा पर स्थित अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र के एक स्थानीय सामुदायिक संगठन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने दावा किया है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भारतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्य किए गए हैं। इस संबंध में नाह वेलफेयर सोसाइटी ने ऊपरी सुबनसिरी जिले के उपायुक्त को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपकर तुरंत उचित कदम उठाने की मांग की है। [1]
नाह वेलफेयर सोसाइटी ने चीन सीमा पर अतिक्रमण को लेकर अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि चीनी सेना ने धीरे-धीरे उन स्थानों पर सड़कों, पुलों और सैन्य शिविरों का निर्माण कर लिया है जो भारतीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। संगठन के अनुसार यह गतिविधियां पिछले एक दशक के दौरान देखी गई हैं। इस निर्माण कार्य की वजह से स्थानीय समुदायों द्वारा उपयोग की जाने वाली पारंपरिक चराई भूमि, शिकार के मैदानों और पैतृक क्षेत्रों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है।
ज्ञापन के दावे
"चीनी सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हमारी भूमि के नए और महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा करके अपने क्षेत्र का बहुत तेजी से विस्तार कर रही है। उन्होंने सड़कों, पुलों का निर्माण किया है और सीमा पर कई स्थानों पर अपने सैन्य शिविर स्थापित किए हैं।" — नाह वेलफेयर सोसाइटी
चीन सीमा पर अतिक्रमण के बारे में संगठन ने उन विशिष्ट स्थानों के नामों का भी उल्लेख किया है जहां कथित तौर पर चीनी सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास हुआ है। इनमें ओयिंग (असाफिला क्षेत्र), पनियार (चुजार्टा क्षेत्र), मरपन (मरनाफे), पोत्रंग झील और टिनडिंगटांग (टीजी) शामिल हैं। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो क्षेत्र साल 2020 से पहले हमारे नियंत्रण में थे, वे अब चीनी सेना के कब्जे में चले गए हैं जिससे स्थानीय लोग चिंतित हैं।

प्रशासनिक मांग
नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि इस संवेदनशील मामले को आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए अरुणाचल प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के पास भेजा जाए। इसके साथ ही सीमावर्ती निवासियों के हितों की रक्षा करने और पारंपरिक भूमि को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की गई है। इस ज्ञापन पर सोसाइटी के अध्यक्ष केरू चादर के हस्ताक्षर हैं और इसके साथ कुछ तस्वीरें भी संलग्न की गई हैं।
अब तक इस पूरे विषय पर जिला प्रशासन, अरुणाचल प्रदेश सरकार, भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। नाह वेलफेयर सोसाइटी द्वारा ज्ञापन में किए गए इन दावों की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं की जा सकी है। हालांकि, चीन सीमा पर अतिक्रमण के दावों के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के सुरक्षा समीकरणों को लेकर सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच सतर्कता बढ़ा दी गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में केवल सुरक्षा बलों और संबंधित सरकारी मंत्रालयों द्वारा जारी आधिकारिक बयानों और सूचनाओं पर ही भरोसा करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।