धनबाद में जल संकट गहराने का डर कटरी नदी का अस्तित्व खतरे में
कटरी नदी का अस्तित्व लगातार हो रहे अवैध अतिक्रमण और अनियोजित खनन के कारण खतरे में है जिससे भविष्य में धनबाद के क्षेत्रों में भारी जल संकट खड़ा हो सकता है।
कटरी नदी का अस्तित्व संकट में
धनबाद, झारखंड। दामोदर की सहायक नदी कटरी अपने वजूद की आखिरी लड़ाई लड़ रही है। कभी करीब डेढ़ सौ फीट चौड़ी रहने वाली यह नदी अब मलबे की डंपिंग और अतिक्रमण के कारण सिमटती जा रही है जिससे पूरे जिले की जलापूर्ति व्यवस्था चरमरा सकती है। कोयला क्षेत्र की आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा नदी के प्राकृतिक प्रवाह के साथ की जा रही छेड़छाड़ से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। समय रहते कदम न उठाए जाने से इस क्षेत्र में पानी की भीषण किल्लत हो सकती है। [1]
आईआईटी आईएसएम के पर्यावरण विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर अंशुमाली के अनुसार कटरी नदी का अस्तित्व संकट में पड़ना मानव सभ्यता और पर्यावरण के लिए एक गंभीर चेतावनी है। करीब तीन सौ वर्ग किलोमीटर में फैला इस नदी का विशाल जलग्रहण क्षेत्र कभी शुद्ध पानी से लबालब रहता था। पहले की तुलना में अब नए खनन कार्यों द्वारा नदीय क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण किया जा रहा है जिससे इसकी जल संचयन क्षमता और चौड़ाई दोनों ही बेहद घट चुकी हैं।
गंभीर आंकड़े
प्रोफेसर अंशुमाली के वर्ष 1974 से 2023 के बीच के आंकड़े कटरी नदी का अस्तित्व कमजोर होने की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक साल 1974 में इस नदी तंत्र में कुल 205 धाराएं सक्रिय थीं जो साल 2023 में घटकर केवल 76 रह गईं। इसका मतलब है कि इसकी 129 धाराएं पूरी तरह गायब हो चुकी हैं। इसके अलावा नदी की कुल लंबाई भी 262 किलोमीटर से घटकर मात्र 174.65 किलोमीटर ही बची है।
नदी का ड्रेनेज डेंसिटी स्तर भी 0.83 से घटकर 0.55 हो गया है जो इसकी जल भंडारण क्षमता के लगातार कमजोर होने का बड़ा सबूत है। पारसनाथ की पहाड़ियों से निकलकर दामोदर नदी में मिलने वाली इस नदी का रास्ता आदिवासी, कृषि, शहरी और खनन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसलिए विशेषज्ञ इसके वैज्ञानिक जीर्णोद्धार के साथ ही पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक एक मजबूत कानूनी ढांचा और रिवर एक्ट बनाने की मांग कर रहे हैं।

परियोजना का सच
दूसरी तरफ नमामि गंगे परियोजना के तहत कटरी के तट पर करीब सात सौ करोड़ रुपये की लागत से एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर के गंदे पानी को साफ करके दोबारा नदी में डालना है। हालांकि जानकारों का मानना है कि यदि नदी का प्राकृतिक प्रवाह ही खत्म हो गया तो इस बेहद महंगी परियोजना की उपयोगिता बहुत सीमित रह जाएगी क्योंकि प्लांट सिर्फ पानी साफ करने तक सीमित है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता उज्जवल सिंह ने आरोप लगाया है कि कोयला क्षेत्र की कंपनियों के मलबे से कटरी नदी का अस्तित्व खत्म हो रहा है। एक कंपनी ने तो नदी के नीचे सीमेंट के पाइप बिछाकर अस्थायी पुल बना दिया है जिससे भारी वाहन गुजरते हैं और प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक जाता है। इस मामले में जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई है पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
अपील और चेतावनी
पूर्व पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद रियाजुद्दीन ने भी इस परियोजना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब नदी में प्राकृतिक पानी ही नहीं बचेगा तो करोड़ों रुपये के प्लांट से कोई लाभ नहीं होने वाला है। इसके साथ ही जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने भी नदी तल पर हुए इस कब्जे को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं और इस पूरे गंभीर मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कटरी नदी का अस्तित्व बचाने के लिए इसके जलग्रहण क्षेत्र और सहायक धाराओं को तुरंत पुनर्जीवित नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक नदी को सिर्फ पुराने दस्तावेजों और नक्शों में ही देख पाएंगी। वर्तमान में विकास और कोयला उत्पादन की होड़ के बीच घटता भूजल स्तर, नष्ट होती जैव विविधता और गहराता जल संकट स्थानीय प्रशासन के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बन चुका है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। पर्यावरण संरक्षण और नदी तटों के पास किसी भी प्रकार की गतिविधियों के संबंध में हमेशा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।