करोड़ों की घूसखोरी नेटवर्क में संलिप्त आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार
तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आखिरकार आरोपी आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार कर लिया है।
आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार
पंचकूला, हरियाणा। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने हरियाणा कैडर के 2012 बैच के एक चर्चित आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच एजेंसी द्वारा यह बड़ी कार्रवाई तीन करोड़ रुपयों की कथित रिश्वतखोरी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में की गई है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि रिश्वत के तार सीधे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात बड़े अफसरों से जुड़े हुए हैं। [2]
वर्तमान में यह आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार होने से पहले दिल्ली में ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) में सेंट्रल डेपुटेशन पर तैनात थे। इसके साथ ही वह नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) में रीजनल डायरेक्टर का प्रभार भी संभाल रहे थे। सीबीआई ने इस मामले की गहनता से तफ्तीश करते हुए दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर और दो अन्य निजी बिचौलियों के खिलाफ भी नामजद मुकदमा दर्ज किया है। [1]
नकली दवाओं का मामला
सीबीआई की शुरुआती जांच के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि आरोपी अधिकारी दीपक गहलावत ने अवैध रूप से मोटी रकम की मांग की थी। जांच टीम के अनुसार, आरोपी ने दावा किया था कि वह अपने ऊंचे निजी प्रभाव का इस्तेमाल करके पुडुचेरी में नकली दवाओं की अवैध बिक्री से जुड़े सीबीआई के मामलों में राहत दिला सकते हैं। इसी प्रभाव की एवज में करोड़ों रुपयों का यह पूरा सौदा तय हुआ था।
इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पुडुचेरी के एक बड़े व्यापारी को सीबीआई जांच से पूरी तरह बचाने और उसके पक्ष में मनमुताबिक नतीजा निकलवाने का झूठा भरोसा दिया था। इसी कड़ी में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए सीबीआई ने पहले भी दिल्ली पुलिस के एक आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह समेत 6 अन्य आरोपियों को दबोचा था, जिसके बाद यह मुख्य आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार किए जा सके।
नकदी और दस्तावेज बरामद
सीबीआई ने इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए अपनी विशेष कार्रवाई के दौरान 90 लाख रुपये की नकद राशि मौके से बरामद की थी। इसके साथ ही छापामार कार्रवाई में कई आपत्तिजनक सरकारी दस्तावेज भी जब्त किए गए थे। जांच टीम ने इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई संभावित ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई अहम सुराग हाथ लगे थे।
केंद्रीय एजेंसी की टीम ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण डिजिटल डिवाइस, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और गुप्त दस्तावेज आदि भी अपने कब्जे में लिए हैं। फिलहाल सीबीआई इस पूरे मामले की आगामी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद कोर्ट से आरोपी का रिमांड मांगा जाएगा ताकि इस घूसखोरी के बड़े नेटवर्क की परतों को खोला जा सके।
रंगे हाथ हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि यह पूरा मामला जून 2026 में सीबीआई द्वारा अंजाम दी गई एक गुप्त ट्रैप की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। उस दौरान केंद्रीय एजेंसी ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और एक कथित मुख्य बिचौलिये राजकुमार को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस गहराई से हुई पड़ताल के बाद ही कड़ियां जुड़ती गईं और अंततः आरोपी आईपीएस अधिकारी गिरफ्तार हुए।
सीबीआई की जांच टीम अब इस मामले की तह तक पड़ताल कर पैसों के अवैध लेनदेन (मनी ट्रेल) और रैकेट में शामिल अन्य संभावित रसूखदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले इस अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद जांच टीम की रडार पर कई अन्य बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी बताए जा रहे हैं, जिनकी जांच जारी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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