दोहा में दो दिवसीय ईरान और अमेरिका वार्ता बिना नतीजे के समाप्त
दोहा में आयोजित ईरान और अमेरिका वार्ता बिना किसी बड़े निर्णय के समाप्त हो गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नया मोड़ आ गया है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
दोहा, कतर। कतर की राजधानी दोहा में दो दिनों तक चली अप्रत्यक्ष ईरान और अमेरिका वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के संपन्न हो गई है। सूत्रों के अनुसार इस चर्चा के दौरान दोनों देशों के राजनयिकों ने मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन और ईरान के रुके हुए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार दो सप्ताह पहले हुए अंतरिम समझौते के बिंदुओं पर ही बातचीत केंद्रित रही और कोई नया समझौता नहीं हो सका। [1]
इस बैठक के बाद कतर के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि जून के युद्धविराम समझौते से संबंधित मामलों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार यह वार्ता स्विट्जरलैंड में हुए पिछले शिखर सम्मेलन के नतीजों को आगे बढ़ाने का एक प्रयास थी। हालांकि बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई सीधी चर्चा नहीं की गई जिसे भविष्य का विषय माना जा रहा है।
शीर्ष नेताओं के बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वाशिंगटन में संवाददाताओं से बात करते हुए दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सीमाओं को लेकर प्रगति हो रही है और निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रयास सही चल रहे हैं। दूसरी ओर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि दोहा में आयोजित इस ईरान और अमेरिका वार्ता का स्वरूप पूरी तरह तकनीकी था। इस सत्र में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों ने कतरी और पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से संवाद स्थापित किया।
कतर के विदेश मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि अगली कूटनीतिक बैठक ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद होगी जिन्हें आगामी नौ जुलाई को दफनाया जाना है। इस बीच कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय रहा कि व्हाइट हाउस द्वारा अत्यधिक महत्वपूर्ण बताई गई इस ईरान और अमेरिका वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधि जेरेड कुशनर और शीर्ष दूत स्टीव विटकॉफ क्षेत्र में उपस्थित होने के बाद भी शामिल नहीं हुए।
वैश्विक बाजार का रुख
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की स्थिति अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है क्योंकि पिछले सप्ताहांत ही एक मालवाहक जहाज पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव देखा गया था। वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से नियंत्रित होता है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे इस मार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं और अगस्त के मध्य से जहाजों पर भारी टोल टैक्स लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ट्रम्प के बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले चार महीनों के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं। इस युद्ध की शुरुआत के बाद विश्लेषकों ने पहली बार तेल की कीमतों के पूर्वानुमान में कटौती की है। इस बीच वांडा इनसाइट्स की संस्थापक वंदना हरि ने कहा कि होर्मुज मार्ग का आंशिक रूप से खुलना बेहद अनिश्चित और अपारदर्शी है जिससे बाजार में स्थिरता की कमी साफ दिखाई दे रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। पाठकों को सूचित किया जाता है कि इस अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम और इसके कारण बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव की वास्तविकता को समझने के लिए केवल आधिकारिक सरकारी बयानों को ही संदर्भ के रूप में स्वीकार करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।