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राजस्थान

निजी हॉस्टल में मासूम बच्चों का शोषण करने का मामला आया सामने

एक निजी हॉस्टल में वार्डन द्वारा मासूम बच्चों का शोषण करने का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

सिरोही, राजस्थान। एक निजी हॉस्टल में रहने वाले छह बच्चों ने वार्डन पर यौन उत्पीड़न का बेहद गंभीर आरोप लगाया है जिसके बाद पुलिस और बाल संरक्षण विभाग हरकत में आ गया है। इस सनसनीखेज शिकायत के सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी हॉस्टल वार्डन को हिरासत में ले लिया है और मामले की सघन जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर पूरी स्थिति की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। [1]

प्रशासन को इस मामले की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मिले एक अज्ञात ईमेल के माध्यम से मिली थी जिसके बाद बाल कल्याण समिति और पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक हॉस्टल परिसर का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इस हॉस्टल में पांच से ग्यारह वर्ष की आयु के लगभग तीस बच्चे रह रहे थे। जब बाल सुधार विशेषज्ञों ने बच्चों की काउंसलिंग की तो छह मासूम बच्चों का शोषण किए जाने की दर्दनाक सच्चाई सामने आई जिसके बाद पुलिस ने वार्डन और हॉस्टल संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

आधिकारिक काउंसलिंग

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद के अनुसार हॉस्टल में करीब तीस बच्चे रह रहे थे जिनकी उम्र पांच से ग्यारह वर्ष के बीच है। संस्थान के औचक निरीक्षण के बाद जब इन सभी बच्चों को सुरक्षित माहौल देकर बातचीत की गई तो स्थिति बेहद गंभीर पाई गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान ही उनमें से छह बच्चों ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि हॉस्टल वार्डन द्वारा उनका शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था।

सचिव सावित्री आनंद ने बताया कि बच्चों के इस बयान के बाद ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और त्वरित विधिक कदम उठाए गए। बच्चों द्वारा दी गई इस बेहद संवेदनशील जानकारी के बाद ही मामले की गंभीरता कई गुना बढ़ गई और पुलिस ने इसे तुरंत कानूनी रिकॉर्ड पर लिया। इस खुलासे के तुरंत बाद ही संबंधित अधिकारियों ने बच्चों के संरक्षण और आरोपी को कानून के शिकंजे में कसने की कागजी कार्रवाई को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया।

पुलिस की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पर्यवेक्षण में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है जो हर पहलू की जांच कर रहा है। पुलिस ने हॉस्टल से सीसीटीवी फुटेज और दो कंप्यूटर जब्त कर लिए हैं ताकि तकनीकी साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सके। पुलिस पीड़ित बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी करवा रही है जिससे कानूनी तौर पर आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें और सभी दोषियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।

मासूम बच्चों का शोषण करने के लिए आरोपी वार्डन उन्हें महंगे उपहार, क्रिकेट किट, खिलौने और घड़ियां देकर चुप रहने का दबाव बनाता था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह घिनौना कृत्य कितने समय से चल रहा था और क्या हॉस्टल के अन्य बच्चे भी इसका शिकार हुए हैं। प्रशासन ने हॉस्टल में रह रहे सभी तीस बच्चों को तुरंत अपनी सुरक्षा में ले लिया है और उनके पुनर्वास व मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था बाल कल्याण एजेंसियों के माध्यम से कराई जा रही है।

हॉस्टल की अनियमितताएं

अधिकारियों के मुताबिक इस निजी संस्थान के पास संचालन के लिए कोई वैध पंजीकरण नहीं था और न ही वहां बच्चों की उपस्थिति, छात्र शुल्क रसीद या कर्मचारियों के वेतन का कोई रिकॉर्ड मौजूद था। हॉस्टल प्रबंधन इन आवश्यक दस्तावेजों का रखरखाव करने में पूरी तरह विफल रहा जिससे संस्थान की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस प्रशासनिक लापरवाही ने यह भी साबित कर दिया है कि बिना किसी वैध दस्तावेज के बच्चों को इतनी बड़ी संख्या में एक निजी परिसर के भीतर अवैध रूप से रखा जा रहा था।

पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि मासूम बच्चों का शोषण करने के मामले की शुरुआती जांच में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार मिल चुके हैं। पुलिस हॉस्टल से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी सक्रियता से जांच कर रही है ताकि किसी भी मददगार को बख्शा न जाए। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले और मासूम बच्चों का शोषण करने वाले किसी भी अपराधी को कानून के दायरे में लाकर सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।

"मामले की हर एंगल से बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।" — मुकेश चौधरी, सर्कल इंस्पेक्टर

अस्वीकरण (Disclaimer): 

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति समाज को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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