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रसोई गैस और सीएनजी संकट टला, सरकार ने वापस लिए कड़े नियम

रसोई गैस और सीएनजी की किल्लत का खतरा अब पूरी तरह टल गया है। खाड़ी देशों में युद्ध विराम के बाद सरकार ने गैस सप्लाई पर लगी आपातकालीन पाबंदियां हटा दी हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, भारत। भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में युद्ध थमने और समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने के बाद गैस सप्लाई पर लगाए गए कड़े आपातकालीन नियमों को वापस ले लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को इस संबंध में एक नया आदेश जारी किया है। इस नए फैसले के तहत पहले लागू की गई सभी पाबंदियों को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब देश में बनने वाली और बाहर से आयात होने वाली गैस को सरकार द्वारा तय की गई नई प्राथमिक सूची के आधार पर उद्योगों और रसोई गैस बनाने वाली कंपनियों को सामान्य रूप से बेचा जाएगा। [1]

सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह आपातकालीन आदेश 9 मार्च को तब जारी किया था, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले एलएनजी जहाज रुक गए थे। उस संकट के समय गैस सप्लायर्स ने भारत को ईंधन भेजने में असमर्थता जता दी थी और जहाजों को दूसरे देशों की तरफ मोड़ दिया था। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने अब साफ किया है कि वर्तमान स्थिति में बहुत तेजी से सुधार हुआ है। वहां शांति वार्ता शुरू होने के बाद समुद्री रास्तों से गैस वाले जहाजों का आना-जाना पूरी तरह शुरू हो चुका है।

राहत का फैसला

खाड़ी क्षेत्र में संकट के चलते जब ऊर्जा सप्लाई पर खतरा मंडराया था, तब सरकार ने तीन बड़े आपातकालीन कदम उठाए थे। पहले दो कदमों के तहत रिफाइनरियों को रसोई गैस का उत्पादन बढ़ाने और बड़े उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री सीमित करने को कहा गया था। इन दोनों नियमों को स्थिति सुधरने पर पहले ही वापस लिया जा चुका था, और अब गैस सप्लाई से जुड़ी पाबंदियां भी हटा दी गई हैं। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार होने के नाते भारत अपनी जरूरत की लगभग आधी गैस के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।

भारत अपनी कुल आवश्यकता की लगभग 65% गैस पश्चिम एशिया के देशों से ही जहाजों के जरिए मंगवाता है। इसी वजह से समुद्री रास्तों में रुकावट आने पर भारतीय बाजार में रसोई गैस और सीएनजी का संकट पैदा होने का डर रहता है। मार्च के महीने में इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था। भारत ने दूसरे देशों से कच्चा तेल खरीदकर बैकअप तो बना लिया था, लेकिन कतर से आने वाली रसोई गैस के जहाज इसी समुद्री रास्ते से गुजरते हैं, इसलिए गैस पर संकट लगातार बना हुआ था।

सप्लाई हुई सामान्य

मार्च में लागू हुए कड़े नियमों के तहत सरकार ने रसोई गैस वाले घरों, गाड़ियों के लिए सीएनजी और पाइपलाइन संचालन को पिछले छह महीनों की औसत खपत का 100% कोटा बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके अलावा खाद कारखानों को उनकी जरूरत का 70% और उद्योगों को उपलब्धता के आधार पर 80% गैस की गारंटी दी गई थी। इन प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने बिजलीघरों को दी जाने वाली गैस में कटौती की थी। सरकारी कंपनी गेल को इस पूरी सप्लाई पर नजर रखने और प्रबंधन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

अब सरकार ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि समुद्री रास्ता पूरी तरह खुलने के बाद इन आपातकालीन नियमों और व्यावसायिक पाबंदियों की कोई जरूरत नहीं रह गई है। इस फैसले के बाद अब घरेलू बाजार में उद्योगों को भी पर्याप्त मात्रा में ईंधन मिल सकेगा। इससे आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली रसोई गैस और सीएनजी की सप्लाई भी बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से जारी रहेगी। खाड़ी देशों में शांति बहाल होने से भारतीय कंपनियों और आम नागरिकों ने बड़ी राहत की सांस ली है क्योंकि गैस की किल्लत पूरी तरह खत्म हो गई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। वर्तमान तकनीकी और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए पाठक केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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