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दहशत की पराकाष्ठा बना सर्पदंश का अनोखा मामला

सागर जिला के धुरमार गांव में एक छात्र को आठ महीने में लगातार चार बार सर्पदंश का अनोखा मामला सामने आया है जिससे पूरा परिवार डरा हुआ है।

By अजय त्यागी
1 min read
अस्पताल में उपचाराधीन छात्र

अस्पताल में उपचाराधीन छात्र

सागर, मध्य प्रदेश। जिला के बंडा तहसील के धुरमार गांव में बारहवीं के छात्र नमन चौबे के साथ पिछले आठ महीने से लगातार जानलेवा हादसे हो रहे हैं। इस युवा छात्र को आठ महीने के अंतराल में चार बार विषैले सांप ने अपना शिकार बनाया है, जिससे यह सर्पदंश का अनोखा मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। यह केवल परिजनों की सजगता ही है कि हर बार नमन को समय रहते सरकारी अस्पताल में इलाज मिल गया जिससे उसकी जान बच सकी। हालांकि इस अजीब सिलसिले ने पूरे परिवार को अज्ञात खौफ के साए में जीने पर मजबूर कर दिया है और सभी लोग डरे हुए हैं। [1]

यह डरावना वाकया मंगलवार की रात फिर से सामने आया जब नमन अपने घर में आराम कर रहा था और अचानक सांप ने उसे डस लिया। सांप के काटते ही छात्र की स्थिति खराब होने लगी और उसे बहुत तेज बुखार आ गया। परिजन उसे तुरंत बंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर भागे। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे सागर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों की देखरेख में सघन इलाज के बाद वर्तमान में नमन की स्थिति खतरे से पूरी तरह बाहर बताई जा रही है।

परिजनों की विकल स्थिति

नमन के चाचा प्रभुदयाल चौबे ने बताया कि मंगलवार की रात नमन को घर के अंदर ही सांप ने काटा था। उन्होंने चिंतित होकर कहा कि हमारा पूरा परिवार इस बात को लेकर गहरे सदमे में है कि आखिर केवल नमन को ही निशाना बनाकर पिछले आठ महीने में यह सर्पदंश का अनोखा मामला क्यों घटित हो रहा है। इस अजीब घटनाक्रम ने नमन सहित पूरे परिवार के दिल में ऐसी गहरी दहशत पैदा कर दी है कि सभी लोग घर में हर समय डरे रहते हैं।

नमन को सबसे पहले पिछले साल नवंबर में सांप ने डसा था जिसके ठीक एक महीने बाद दिसंबर में वह दोबारा इस हादसे का शिकार हुआ। इसके बाद जनवरी में तीसरी बार उसे सांप ने काटा और तीस जून को चौथी बार यह भयानक वाकया दोबारा घट गया। नमन के चाचा ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद गांव के लोग इसे अंधविश्वास से जोड़ रहे हैं, जबकि डॉक्टरों के सही इलाज से ही बच्चे की सांसें लौटी हैं।

अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार

परिजनों ने आम जनता से अपील की है कि वे सांप काटने पर कभी भी किसी झाड़फूंक या ढोंगी बाबाओं के चक्कर में फंसकर अपना कीमती समय बर्बाद न करें। ऐसी घटनाओं में मरीज को सीधे अस्पताल लेकर जाना चाहिए क्योंकि वहां उपलब्ध एंटी-वेनम दवाएं ही किसी भी इंसान को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल सकती हैं। अंधविश्वास के दलदल में फंसकर ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर अपनों को खो देते हैं इसलिए इस सामाजिक बुराई के खिलाफ वैचारिक रूप से जागरूक होना जरूरी है। इसी जागरूकता से समाज में यह सर्पदंश का अनोखा मामला एक मिसाल बनेगा।

"नमन सांप के काटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल आया है। जहां उसकी हालत खतरे से बाहर है। परिवार ने अच्छा किया की उसे अस्पताल लेकर आए बजाय किसी झोलाछाप के पास ले जाकर। मेरी सभी से अपील है कि अगर इस तरह सांप काटने की घटनाएं हों तो किसी झाड़फूंक की बातों में न आकर अस्पताल में ही इलाज करवाएं।" — अभिषेक ठाकुर, सर्प दंश प्रभारी जिला अस्पताल

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचनात्मक उद्देश्य से किया गया है। सर्पदंश की स्थिति में किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा झाड़फूंक के चक्कर में पड़े बिना अविलंब नजदीकी मान्यता प्राप्त सरकारी चिकित्सालय में जाकर विशेषज्ञ डॉक्टरों से आपातकालीन उपचार प्राप्त करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक उत्तरदायी नहीं हैं।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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