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हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक राजनीति का मुख्य केंद्र बिंदु

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के जरिए ईरान राजनीति में अपनी धाक जमा रहा है और अमेरिकी दबाव को खारिज कर झुकने से इनकार कर रहा है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

तेहरान, ईरान। दिवंगत ईरानी सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में उमड़े भारी जनसैलाब ने वैश्विक शक्तियों को एक बहुत कड़ा संदेश दिया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा उसे कमजोर करने की तमाम कोशिशें अब पूरी तरह विफल रही हैं। ईरान युद्ध से कमजोर होने के बजाय पहले से अधिक एकजुट और आक्रामक होकर उभरा है। इस अभूतपूर्व एकजुटता ने देश को वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतियों को बिल्कुल नए सिरे से तय करने का एक बड़ा अवसर प्रदान किया है। अब ईरान इस शक्ति का उपयोग कूटनीतिक वार्ताओं में अपनी शर्तों को मनवाने के लिए मजबूती से कर रहा है। [1]

ईरान की नई कूटनीतिक चाल

क्षेत्रीय अधिकारियों और राजनयिकों का मानना है कि ईरान अपनी भू-राजनीतिक स्थिति का लाभ उठाने की पूरी कोशिश कर रहा है। वह परमाणु समझौते पर किसी भी चर्चा से पहले हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने संप्रभु नियंत्रण को वैश्विक मान्यता दिलाना चाहता है। ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को केवल एक आर्थिक साधन नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक वैधता का प्रतीक मानता है। उसके लिए इस क्षेत्र पर अपना वर्चस्व बनाए रखना वर्तमान समय में सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है और वह इस पर दृढ है।

अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित साठ दिनों का संघर्षविराम कूटनीति बहाल करने के लिए था लेकिन इसने एक अलग ही प्रतिस्पर्धा को जन्म दे दिया है। ईरान बातचीत की प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा कर रहा है ताकि वह इस दौरान हुए रणनीतिक लाभ को स्थायी रूप से सुरक्षित कर सके। ईरान के लिए वर्तमान समय में परमाणु कार्यक्रम से अधिक महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग पर अपने नियंत्रण को संस्थागत रूप देना है जिसके माध्यम से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार ईरान भलीभांति जानता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति घरेलू राजनीति और आगामी चुनावों के कारण इस समय किसी नए सैन्य टकराव से बचना चाहते हैं। इस राजनीतिक शून्यता का फायदा उठाकर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में पारगमन व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र के माध्यम से अपने प्रभाव को निरंतर गहरा कर रहा है। वाशिंगटन का सैन्य अभियान ईरान के इस कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव को कम करने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ है जिससे अमेरिका बैकफुट पर आ गया है।

खाड़ी देश इस बात से गहराई से चिंतित हैं कि इस युद्ध ने ईरान को एक ऐसा रणनीतिक लाभ दे दिया है जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं होगा। अब प्रतिबंधों में ढील या जमे हुए फंड की वापसी जैसी रियायतें ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना मजबूत दावा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक शक्तियों को अंततः ईरान द्वारा तय की गई शर्तों पर ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के लिए सहमत होना पड़ेगा।

भविष्य की वैश्विक चुनौतियां

इस पूरे घटनाक्रम ने यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि पश्चिमी देशों की सैन्य ताकत भी इस क्षेत्र में ईरान की स्थिति को बुनियादी तौर पर बदलने में असमर्थ रही है। ईरान परमाणु फाइल पर तब तक कोई गंभीर चर्चा नहीं करना चाहता जब तक कि दुनिया हॉर्मुज जलडमरूमध्य की इस नई जमीनी हकीकत को स्वीकार नहीं कर लेती। ईरान का यह अड़ियल रुख आने वाले समय में वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।

बदलते वैश्विक परिदृश्य में ईरान अपनी इस रणनीतिक जीत को एक दिव्य आशीर्वाद की तरह देख रहा है जिसे वह किसी भी परिस्थिति में गंवाना नहीं चाहता। अमेरिका की कूटनीतिक विफलता ने ईरान को अधिक आक्रामक होने का मौका दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक समुदाय इस नए शक्ति संतुलन के साथ कैसे तालमेल बिठाता है क्योंकि इस कूटनीतिक जंग में ईरान खुद को बहुत मजबूत स्थिति में महसूस कर रहा है और पीछे हटने को तैयार नहीं है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट और तेल आपूर्ति मार्ग के रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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