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चीन ने परमाणु पनडुब्बी से मिसाइल दागकर प्रशांत में बढ़ाई हलचल

चीन ने परमाणु पनडुब्बी से प्रशांत में मिसाइल दागकर खलबली मचा दी है जिससे अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसी शक्तियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण

बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण

बीजिंग, चीन। चीनी सेना ने सोमवार को एक परमाणु पनडुब्बी से प्रशांत महासागर में बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। आधिकारिक मीडिया के अनुसार इस परमाणु पनडुब्बी से छोड़ी गई मिसाइल में डमी वारहेड लगा हुआ था जिसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर दोपहर को दागा गया। चीन ने इसे एक नियमित वार्षिक सैन्य अभ्यास का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह किसी देश को लक्षित नहीं था। चीनी विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि यह परीक्षण पूरी तरह से सुरक्षित और पेशेवर तरीके से संपन्न हुआ है। [1]

वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया

अमेरिकी विदेश विभाग ने इस चीनी परीक्षण की पुष्टि करते हुए कहा कि वे इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका ने चीन से हथियारों पर नियंत्रण को लेकर सार्थक बातचीत करने का आग्रह किया है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह चीन की सबसे आधुनिक जेएल तीन मिसाइल हो सकती है जो अमेरिकी मुख्य भूमि तक मार करने में पूरी तरह सक्षम है। इस परीक्षण के समय को लेकर प्रशांत क्षेत्र के देशों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

प्रशांत क्षेत्र के देशों ऑस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और जापान को इस परीक्षण की जानकारी बहुत कम समय पहले दी गई थी। यह परीक्षण ठीक उसी समय हुआ जब ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे। ऑस्ट्रेलिया ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत में पारदर्शिता की भारी कमी है जो इस क्षेत्र के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

बढ़ता भू राजनीतिक तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस परीक्षण के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया और फिजी के नए समझौते के प्रति अपनी नाराजगी का संदेश देना चाहता है। हालांकि यह कदम दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के देशों में चीन की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। न्यूजीलैंड ने भी इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि वह प्रशांत महासागर को किसी भी देश के मिसाइल परीक्षण स्थल के रूप में इस्तेमाल होते नहीं देखना चाहता है।

ताइवान ने इस सैन्य गतिविधि को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने और धमकाने का एक चीनी प्रयास करार दिया है। ताइवान लंबे समय से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और रूस के साथ उसके संयुक्त अभ्यासों को लेकर दुनिया को आगाह करता रहा है। जापान ने भी चीनी सैन्य गतिविधियों के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता व्यक्त की है और बीजिंग से अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने को कहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर

चीन ने इससे पहले साल दो हजार चौबीस में एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था जिसने उसकी बढ़ती सैन्य क्षमताओं को उजागर किया था। वर्तमान समय में हुए इस नए परीक्षण ने क्षेत्र के शक्ति संतुलन को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। पश्चिमी देश अब चीन की इस परमाणु पनडुब्बी क्षमता का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके।

इस मिसाइल परीक्षण ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपनी सुरक्षा रणनीतियों को और अधिक मजबूत करने पर मजबूर कर दिया है। प्रशांत महासागर में चीन का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को व्यापक रूप से प्रभावित करेगा। अब यह देखना होगा कि वैश्विक समुदाय चीन के इस बढ़ते दबदबे और परमाणु पनडुब्बी के खतरों का मुकाबला किस प्रकार मिलकर करता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट प्रशांत महासागर में चीन की सैन्य गतिविधि और उससे उत्पन्न वैश्विक सुरक्षा चिंताओं को दर्शाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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