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शेयर बाजार में भारी गिरावट के कारण सेंसेक्स और निफ्टी टूटे

शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है जिससे सेंसेक्स सोलह सौ अंक से ज्यादा टूट गया है और पश्चिम एशिया संकट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

मुंबई, महाराष्ट्र। शेयर बाजार में भारी गिरावट का एक नया और बेहद डरावना दौर बुधवार को देखने को मिला है जिसने निवेशकों के भरोसे को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। पिछले तीन महीनों से अधिक के समय में भारतीय शेयर बाजार में यह सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंका के कारण वैश्विक बाजारों सहित घरेलू बाजार में भी चौतरफा बिकवाली देखने को मिली है। [1]

इस बड़े संकट के कारण प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सोलह सौ सतहत्तर अंक से ज्यादा फिसलकर छिहत्तर हजार पांच सौ तीन के स्तर पर बंद हुआ है। दूसरी ओर निफ्टी भी पांच सौ सोलाह अंकों की बड़ी कमजोरी के साथ तेईस हजार आठ सौ बयासी के स्तर पर आ गया है। इस बिकवाली के कारण बाजार के लगभग सभी महत्वपूर्ण सेक्टर्स लाल निशान में चले गए जिससे निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बाजार का तकनीकी ढांचा

शेयर बाजार में भारी गिरावट आने के बाद अब बाजार के तकनीकी विशेषज्ञों ने निफ्टी के लिए नए स्तरों की घोषणा की है। विश्लेषकों का मानना है कि अब चौबीस हजार का स्तर बाजार के लिए एक मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र के रूप में काम करेगा। यदि सूचकांक को अपनी पुरानी बढ़त दोबारा हासिल करनी है तो उसे इस स्तर से ऊपर लगातार बने रहना होगा जो मौजूदा परिस्थितियों में काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

दूसरी तरफ नीचे की ओर तेईस हजार आठ सौ का स्तर अब एक बहुत ही महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बन गया है। यदि बाजार इस स्तर से भी नीचे चला जाता है तो बिकवाली का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में निफ्टी आसानी से तेईस हजार छह सौ से तेईस हजार पांच सौ के निचले स्तरों की तरफ फिसल सकता है जिससे आने वाले दिनों में और गिरावट आ सकती है।

तनाव से बिगड़ा सेंटिमेंट

शेयर बाजार में भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा जिसने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है जिसके बाद स्ट्रेट ऑफ होरमुज में दोनों तरफ से हमले शुरू हो गए। इस भू राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स यानी शेयरों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है।

इस बिकवाली के दौर में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार में बैंकिंग और पीएसयू बैंक सेक्टर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई है जिससे पूरा वित्तीय ढांचा दबाव में आ गया है। केवल मेटल और फार्मा कंपनियों ने इस गिरावट के माहौल में थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने नुकसान को सीमित रखने में कामयाबी हासिल की है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह से बाजार के जोखिमों और वैश्विक परिस्थितियों के अधीन होता है इसलिए कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने सलाहकार से परामर्श अवश्य लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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