WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

मानसून में सुधार के साथ ही खरीफ बुवाई की रफ्तार तेज होगी

खरीफ बुवाई की रफ्तार बढ़ाने के लिए कृषि मंत्री ने बड़ी योजना पेश की है क्योंकि जुलाई में मानसून में सुधार से फसलों की बुवाई अधिक से अधिक की जा रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
खरीफ की बुवाई

खरीफ की बुवाई

नई दिल्ली, दिल्ली। खरीफ बुवाई की रफ्तार तेज करने के लिए केंद्र सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है जिससे देश के करोड़ों किसानों को बड़ी उम्मीद जगी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार अल नीनो के संभावित प्रभावों पर बहुत बारीकी से नजर रख रही है। इसके लिए एक व्यापक निगरानी प्रणाली लागू की गई है। कृषि मंत्री ने भरोसा जताया है कि इस महीने मानसून और मजबूत होगा जिससे खरीफ फसलों की बुवाई को बड़ी गति मिलेगी। [1]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार पूरी तैयारी और एक स्पष्ट रणनीति के साथ जमीनी स्तर पर काम कर रही है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मौसम को लेकर कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं लेकिन संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र को समय से पहले ही सक्रिय कर दिया गया है। देश का कृषि विभाग अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रहा है।

मानसून में बड़ा सुधार

खरीफ बुवाई की रफ्तार को बढ़ाने में जुलाई के दौरान मानसून में आया सुधार सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कृषि मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि जून महीने में देश के भीतर लगभग तैंतीस प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई थी। लेकिन जुलाई की शुरुआत के साथ ही स्थिति में काफी बड़ा सुधार देखने को मिला है। अब देश में कुल बारिश की कमी घटकर केवल चौबीस प्रतिशत रह गई है जिससे कृषि क्षेत्र को काफी राहत मिली है।

हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में बहुत अच्छी बारिश हुई है जिसके परिणामस्वरूप बारिश की कमी का सामना कर रहे जिलों की संख्या दो सौ बासठ से घटकर केवल एक सौ अठहत्तर रह गई है। सरकार वर्तमान में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और बिहार सहित देश के प्रमुख राज्यों की स्थिति पर बहुत पैनी नजर रख रही है ताकि किसानों को समय पर हर संभव सहायता पहुँचाई जा सके।

वैकल्पिक फसलों की सलाह

खरीफ बुवाई की रफ्तार पिछले साल की तुलना में अभी थोड़ी धीमी है क्योंकि अब तक करीब तीन सौ पचास लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई पूरी हो सकी है। मानसून के समय से देरी से आने के कारण विशेष रूप से सोयाबीन और कपास की खेती सबसे अधिक प्रभावित हुई है। इस स्थिति से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली मक्का, बाजरा और मूंग जैसी फसलें उगाने की विशेष सलाह दी है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से संभावित प्रभावित जिलों के लिए एक विशेष आकस्मिक योजना भी तैयार कर राज्य सरकारों के साथ साझा की गई है। इसके अलावा जून में चलाए गए खेत बचाओ अभियान के तहत एक लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित कर अस्सी लाख किसानों से सीधा संपर्क साधा गया है। सरकार ने संकट से निपटने के लिए पौने दो लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज आरक्षित कोष भी पूरी तरह सुरक्षित रखा है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कृषि योजनाओं, बीज उपलब्धता और मौसम के पूर्वानुमान से जुड़े इस घटनाक्रम के संबंध में सटीक कृषि तकनीकी परामर्श के लिए हमेशा स्थानीय कृषि विभाग या किसान हेल्पलाइन से संपर्क करें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source