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डिजिटल सखी परियोजना से ग्रामीण महिलाएं बनेंगी अब पूरी आत्मनिर्भर

डिजिटल सखी परियोजना के अंतर्गत कार्यशाला का आयोजन हुआ। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई है।

By अजय त्यागी
1 min read
डिजिटल सखी परियोजना की कार्यशाला

डिजिटल सखी परियोजना की कार्यशाला

पिपराइच, उत्तर प्रदेश। डिजिटल सखी परियोजना के अंतर्गत पिपराइच ब्लॉक सभागार में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत एक दिवसीय क्लस्टर स्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया है। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही सरकार की विभिन्न कल्याणकारी उद्यमिता योजनाओं को समाज के अंतिम छोर पर बैठी महिलाओं तक पहुँचाना है। बैठक में महिला उद्यमिता, वित्तीय समावेशन, एमएसएमई पंजीकरण और स्वरोजगार के नए अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और खंड विकास अधिकारी श्याम लाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय आर्थिक भागीदारी बढ़ाना समय की सबसे बड़ी मांग है। इसके लिए सभी सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुँचना बेहद आवश्यक है। उन्होंने ब्लॉक की सभी डिजिटल सखियों से आह्वान किया कि वे अपने अपने गांवों में जाकर अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को नए स्वरोजगार से जोड़ने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

सरकारी ऋण योजनाएं

डिजिटल सखी परियोजना की संयुक्त कार्यक्रम समन्वयक गीता कौर ने उपस्थित सभी अधिकारियों का स्वागत किया। उन्होंने जनपद गोरखपुर में चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी देते हुए महिला उद्यमिता विकास में सखियों के योगदान को रेखांकित किया। जिला उद्योग केंद्र के प्रबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव और सुजीत कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि इक्कीस से चालीस वर्ष के युवाओं को बिना ब्याज और गारंटी के पांच लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है।

अधिकारियों ने आगे बताया कि इस ऋण योजना का लाभ आठवीं पास युवा भी आसानी से उठा सकते हैं। कार्यशाला में ऑनलाइन आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज और एमएसएमई पंजीकरण के फायदों के बारे में भी विस्तार से बताया गया। इस दौरान एल एंड टी फाइनेंस और विभिन्न बैंकिंग संस्थानों द्वारा उद्यम स्थापित करने के बाद मिलने वाले वित्तीय मार्गदर्शन और हैंडहोल्डिंग सपोर्ट पर भी बात की गई ताकि ग्रामीण व्यवसायों को बाजार में टिके रहने में मदद मिल सके।

विभागीय तालमेल 

डिजिटल सखी परियोजना के इस आयोजन में पिपराइच क्षेत्र के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यशाला में कृषि विभाग से दशरथ भारती पंचायत राज से अरविंद कुमार तिवारी और ग्रामीण विकास विभाग से अशरफ अली अंसारी ने भाग लिया। इनके साथ ही बाल विकास परियोजना अधिकारी सुशीला और विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता विनोद कुमार चौधरी सहित ग्राम पंचायत अधिकारी एकता पांडेय भी उपस्थित रहीं जिन्होंने योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की।

सभी विभागीय अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने अपने कार्यक्षेत्र से जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं की तकनीकी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने डिजिटल सखियों को ग्रामीण स्तर पर काम करने के लिए पूर्ण प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया। कार्यशाला में हेमा गिरी सुनीता देवी आशा रंजना यादव शीला देवी और रंजीत कुमार सहित अनेक प्रगतिशील महिला उद्यमियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया।

ग्रामीण विकास का संकल्प

डिजिटल सखी परियोजना के इस मंच पर सौर ऊर्जा संरक्षण और संवर्धन को ग्रामीण उद्योगों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया ताकि पर्यावरण के अनुकूल आजीविका को बढ़ावा दिया जा सके। कृषि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के विभिन्न अधिकारियों ने अपने विभागों की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की और सखियों को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यशाला में हेमा गिरी सुनीता देवी रूबी देवी और सरोज पाल जैसी अनेक महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए।

खंड विकास अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने डिजिटल सखियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं बल्कि समाज में एक प्रभावी सामुदायिक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रही हैं। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने अपने कार्यक्षेत्र की पात्र महिलाओं का एमएसएमई पंजीकरण सुनिश्चित करने और उन्हें सरकारी आजीविका मिशन से जोड़ने का दृढ़ संकल्प लिया जिससे विकास को एक नया आयाम मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सरकारी ऋण योजनाओं, एमएसएमई पंजीकरण और डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जुड़े इस विषय में किसी भी आवेदन से पूर्व संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ब्लॉक कार्यालय से नियमों की पुष्टि अवश्य कर लें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief