पत्रकारिता के स्तंभ थे राजेन्द्र व्यास, पत्रकार जगत में शोक
वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र व्यास का 72 वर्ष की आयु में निधन। राजनांदगांव सहित पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकार जगत में शोक, सादगी और मूल्यों के थे सच्चे प्रतीक।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़। बीकानेर के मूल निवासी, प्रेस क्लब राजनांदगांव के संरक्षक और दैनिक अमृत संदेश के वरिष्ठ ब्यूरो चीफ राजेंद्र व्यास का बुधवार को 72 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे काफी समय से बीमार चल रहे थे, और उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही थी। उनके निधन की खबर सुनते ही, पूरे जिले और प्रदेश के मीडिया गलियारों में उदासी छा गई है। उनके जाने से राजनांदगांव सहित, पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकार जगत में शोक की लहर है और उनके प्रशंसकों में भारी मायूसी है। [1]
राजेंद्र व्यास का पारिवारिक नाता, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा और अमृत संदेश के संस्थापक गोविंदलाल वोरा से था। वे उनके सगे भांजे थे। हालांकि वे एक बेहद प्रभावशाली और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनकी कार्यशैली बेहद सरल और जमीन से जुड़ी रही। उन्होंने कभी भी अपनी लेखनी पर, राजनीतिक प्रभाव को हावी नहीं होने दिया। उनके पीछे उनका भरा पूरा परिवार है, जिसमें उनके पुत्र अंकित व्यास, जो कि एक स्कूल प्राचार्य हैं, और उनकी पुत्री शामिल हैं।
सादगी और मूल्यों के थे प्रतीक
वे पत्रकारिता को व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम मानते थे। उनकी लेखनी हमेशा, आम जनता की समस्याओं के लिए समर्पित रही है। वे जिले के ग्रामीण अंचलों की खबरों को, मुखरता से उठाने के लिए जाने जाते थे। जब भी कोई बड़ी जनसमस्या सामने आती थी, तो वे सबसे पहले आवाज उठाते थे। यही कारण है कि उनके निधन के बाद, आज पूरे पत्रकार जगत में शोक व्याप्त है और हर कोई उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद कर रहा है।
वे केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि युवा पत्रकारों के लिए एक आदर्श शिक्षक और संरक्षक थे। प्रेस क्लब में युवाओं को, वे सदैव नैतिक पत्रकारिता का पाठ पढ़ाते थे। वे खोजी पत्रकारिता, और तथ्यों की बारीकी से जांच करने की सलाह देते थे। उनके मार्गदर्शन में, कई पत्रकारों ने अपने करियर की शुरुआत की और आज वे ऊंचे पदों पर कार्यरत हैं। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे भर पाना नामुमकिन सा लगता है।
प्रेरणादायक पत्रकारिता का युग
राजेंद्र व्यास अपनी निर्भीक और निष्पक्ष लेखन शैली के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कभी भी किसी दबाव में आकर, अपनी लेखनी को समझौता करने नहीं दिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ, उन्होंने हमेशा कड़ा रुख अपनाया और शासन के सामने जनता की आवाज को मजबूती से रखा। उनके इसी साहसी स्वभाव के कारण, आज संपूर्ण पत्रकार जगत में शोक स्वाभाविक है क्योंकि उन्होंने जनहित के मुद्दों को लेकर हमेशा बड़े अभियान चलाए थे। उनकी कमी राजनांदगांव की पत्रकारिता में, लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
उनकी अंतिम यात्रा, गुरुवार को दोपहर तीन बजे उनके निवास स्थान हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी लालबाग से निकाली जाएगी। इसके बाद लखोली मुक्तिधाम में, उनका अंतिम संस्कार संपन्न होगा। इस कठिन घड़ी में उनके परिवार को ढांढस बंधाने के लिए, बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक और मीडियाकर्मी उनके आवास पर पहुंच रहे हैं। हर कोई उनके साथ बिताए उन पलों को याद कर रहा है। इस दुखद अवसर पर आज, पूरे पत्रकार जगत में शोक का माहौल देखा जा रहा है।
भावभीनी अंतिम विदाई
राजेंद्र व्यास का जाना, एक युग का अंत माना जा रहा है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी, पत्रकारिता की मर्यादाओं को बनाए रखने में समर्पित कर दी। वे आज भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों के कारण, लोगों के दिलों में जीवित हैं। उनके साथियों का कहना है कि उन्होंने जो राह दिखाई है, उस पर चलकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। यही कारण है कि आज पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकार जगत में शोक की स्थिति है, और सभी नम आंखों से उन्हें विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। वरिष्ठ दिवंगत पत्रकार राजेंद्र व्यास जी के जीवन परिचय, अंतिम यात्रा के निर्धारित समय, और शोक संदेशों की अधिकृत जानकारी के लिए उनके पारिवारिक सदस्यों अथवा प्रेस क्लब राजनांदगांव द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य को देखें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।