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ईरान अमेरिका युद्ध के कारण खाड़ी देशों की मुश्किलें बढ़ीं

ईरान अमेरिका युद्ध का असर अब खाड़ी देशों की कंपनियों की दूसरी तिमाही के नतीजों में साफ दिखेगा तेल और बैंकिंग क्षेत्रों में बड़े बदलाव की आशंका है।

By अजय त्यागी
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प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

दुबई, यूएई। खाड़ी सहयोग परिषद के देशों की कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य पर ईरान अमेरिका युद्ध का असर अब पूरी तरह से दिखने लगा है। इस सप्ताह जारी होने वाले दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे इस क्षेत्रीय संकट के आर्थिक प्रभावों की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे। सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे देशों में व्यावसायिक प्रदर्शन काफी मिलाजुला रहने की उम्मीद है। रायटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों का मानना है कि पहले से मौजूद चुनौतियों के बीच इस टकराव ने मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को प्रभावित कर बाजार की स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। [1]

बैंकिंग और रियल एस्टेट 

क्षेत्र के बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्रों पर ईरान अमेरिका युद्ध का असर सबसे प्रतिकूल पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार व्यापार वित्त में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर क्रेडिट कार्ड खर्च में कमी आने से बैंकों के मुनाफे में गिरावट आ सकती है। हालांकि वित्तीय संस्थानों के पास पर्याप्त नकदी मौजूद है लेकिन अनिश्चितता के कारण उनकी ऋण वृद्धि धीमी होने की संभावना है। कुछ बैंकों ने नए जमाकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा दी हैं ताकि बाजार में नकदी का प्रवाह सामान्य बना रहे।

दूसरी ओर रियल एस्टेट बाजार में भी सुस्ती के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। दुबई और अबू धाबी में आवासीय संपत्तियों की बिक्री युद्ध पूर्व के स्तर से काफी नीचे चली गई है। तनाव लंबे समय तक बने रहने के कारण विदेशी प्रवासियों के आगमन और पर्यटन से जुड़ी मांग प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते कई बड़े डेवलपर्स अपनी नकदी बचाने के लिए लाभांश भुगतान को कम या स्थगित कर रहे हैं। हालांकि मजबूत बैलेंस शीट वाले बड़े डेवलपर्स इस बड़े झटके को झेलने में सक्षम नजर आ रहे हैं।

ऊर्जा और दूरसंचार 

इस संकट के बीच तेल और गैस कंपनियों की कमाई मजबूत रहने की उम्मीद है क्योंकि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों ने आपूर्ति में हुए व्यवधान के नुकसान की आंशिक भरपाई कर दी है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं जिससे तेल उत्पादक देशों को सीधा लाभ मिल रहा है। हालांकि होर्मुज जलडमरू मध्य के बंद होने से जहाजों के आवागमन में परेशानी जरूर आई है लेकिन मूल्य अस्थिरता ने संभावित लाभ के अवसर भी पैदा किए हैं। सऊदी अरब लाल सागर के माध्यम से अपना निर्यात जारी रखने में सफल रहा है।

इसी तरह दूरसंचार क्षेत्र भी दीर्घकालिक अनुबंधों और स्थिर मांग के कारण इस संकट से काफी हद तक सुरक्षित रहा है। सऊदी अरब की प्रमुख दूरसंचार कंपनियों और यूएई के ऑपरेटरों ने इस अनिश्चित माहौल में भी बेहतरीन लचीलापन दिखाया है। उपभोक्ताओं की आवश्यक सेवाओं में शामिल होने के कारण इस क्षेत्र पर ईरान अमेरिका युद्ध का असर नहीं पड़ा है। यह क्षेत्र मजबूत नकदी प्रवाह के साथ बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है जो आर्थिक स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है।

उपभोक्ता और विमानन 

उपभोक्ता क्षेत्र और खुदरा गतिविधियों में युद्ध के कारण कुछ व्यवधान जरूर देखा गया है लेकिन घर पर उपभोग बढ़ने से कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा भी हुआ है। उदाहरण के लिए दुबई की फूड डिलीवरी फर्मों के शेयरों में पिछले तीन महीनों के दौरान भारी बढ़त दर्ज की गई है। इसके साथ ही खाड़ी देशों की एयरलाइंस की उड़ानों की संख्या भी अब धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट रही है। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक हाइड्रोकार्बन पर निर्भर हैं और उनका भविष्य होर्मुज जलडमरू मध्य की सुरक्षा पर निर्भर करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी नेतृत्व और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वित्तीय बाजार पर ईरान अमेरिका युद्ध का असर और जोखिम प्रीमियम बना रहेगा। हाल ही में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए नए हमलों के बाद शांति समझौते की उम्मीदें कमजोर हुई हैं जिससे उपभोक्ता मांग पर निर्भर कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ गया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में इस साल दो प्रतिशत से अधिक की वृद्धि का अनुमान है जबकि जलमार्ग पर निर्भर अन्य देशों को संकुचन का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर यह तिमाही विजेताओं और हारने वालों को स्पष्ट रूप से विभाजित करेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी देशों के वित्तीय बाजारों और कॉर्पोरेट आय पर भू राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभावों को समझने के लिए यह विश्लेषण प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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