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स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज ने भुला दिया परमाणु कार्यक्रम वाला पिछला एजेंडा

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर नियंत्रण की ईरान की जिद से वैश्विक शांति समझौता खतरे में आ गया है जिससे अमेरिका के साथ नया सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

दुबई, यूएई। खाड़ी क्षेत्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित करना ईरान के लिए अब एक स्वर्ण हथियार बन चुका है। इसके लिए वह पश्चिमी ताकतों और अमेरिका के साथ नए सिरे से सैन्य टकराव मोल लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी प्रशासन के लिए यह जलमार्ग अब उसके परमाणु कार्यक्रम से भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुका है जिसके लिए उसने पूर्व में दशकों तक कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना किया था। इस सप्ताह बिना अनुमति गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर की गई गोलीबारी ने पिछले महीने हुए अंतरिम शांति समझौते को एक बड़े संकट में डाल दिया है। [1]

नया विवाद

ईरानी नेतृत्व स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पश्चिमी देशों के साथ जारी विभिन्न विवादों में अपने सबसे मजबूत मोहरे के रूप में देख रहा है। तेहरान का स्पष्ट मानना है कि इसी रणनीतिक दबाव के कारण वाशिंगटन अंततः युद्ध समाप्त करने के लिए मजबूर हुआ था। संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्यों का कहना है कि अमेरिका को अब इस जलमार्ग पर ईरान की नई व्यवस्था को स्वीकार करना ही होगा। इस नीति पर ईरान के शीर्ष नीति निर्माताओं के बीच कोई मतभेद नहीं है और वे इसे किसी भी स्थिति में अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं।

दूसरी ओर अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय हितधारक इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हैं। अंतरिम समझौते में वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए साठ दिनों की जो मोहलत दी गई थी उसकी व्याख्या दोनों पक्ष अपने-अपने हितों के अनुसार कर रहे हैं। ईरान इसे जलमार्ग पर प्रबंधन के अपने अधिकार की अमेरिकी मान्यता मान रहा है जबकि वाशिंगटन का कहना है कि ईरान को बिना किसी बल प्रयोग के केवल सुरक्षित यातायात की सुविधा देनी चाहिए। इस गतिरोध के कारण क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव की स्थिति बनने लगी है।

गहरा अविश्वास

ईरान के इस कड़े रुख के पीछे अमेरिका के प्रति गहरा अविश्वास है जो वर्ष दो हजार अठारह में परमाणु समझौते से अमेरिकी राष्ट्रपति के पीछे हटने के बाद और बढ़ गया था। ईरान का मानना है कि यदि वह स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर अपने कदम पीछे खींचता है तो अमेरिकी दबाव उसके मिसाइल कार्यक्रम और अन्य रक्षा क्षेत्रों पर और अधिक बढ़ जाएगा। अतीत में इस जलमार्ग को बंद करने की चेतावनी देने वाले ईरानी अधिकारी अब इसे अंतिम हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की रणनीति पर पूरी तरह सहमत दिख रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जब फरवरी में शीर्ष ईरानी कमांडरों पर हमले हुए थे तब ईरान ने अपनी खोने के लिए कुछ न बचता देख स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया था। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी थी जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति इतिहास के सबसे बड़े संकट में फंस गई थी। आर्थिक नुकसान बढ़ने के बाद दोनों पक्ष वार्ता की मेज पर तो आए लेकिन अब ईरान इस क्षमता को स्थायी रूप से औपचारिक रूप देना चाहता है ताकि भविष्य में उसकी स्थिति मजबूत रहे।

बड़ा संकट

दोनों ही पक्ष वर्तमान में तात्कालिक आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन साथ ही वे खुद को विजेता भी मान रहे हैं। इसी कारण समझौते की शर्तों को आगे बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं। ईरान ने अब परमाणु वार्ता को पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है और उसका पूरा ध्यान जलमार्ग पर केंद्रित है। तेहरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर उसके पूर्ण प्रबंधन को स्वीकार नहीं करता तब तक परमाणु कार्यक्रम से जुड़े किसी भी मुद्दे पर नई बातचीत शुरू नहीं की जाएगी।

परमाणु मुद्दा जो पिछले पच्चीस वर्षों से दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य वजह था वह अब इस रणनीतिक जलमार्ग के सामने गौण हो गया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह तनाव बेहद चिंताजनक है क्योंकि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने एक नया आर्थिक संकट खड़ा होने का खतरा पैदा हो जाएगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। खाड़ी क्षेत्र में हॉर्मुज जलमार्ग को लेकर जारी भू-राजनीतिक तनाव और इसके वैश्विक प्रभावों को समझने के लिए यह विश्लेषण प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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