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वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, कई दुर्लभ जीव बचाए गए

सीबीआई और डीआरआई की संयुक्त टीम ने देशव्यापी वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को दबोचा और तिरपन दुर्लभ जीवों को सुरक्षित बचाया।

By अजय त्यागी
1 min read
कई दुर्लभ जीव बचाए गए

कई दुर्लभ जीव बचाए गए

नई दिल्ली, दिल्ली। देश में सक्रिय लुप्तप्राय प्रजातियों के अवैध शिकार और व्यापार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो अर्थात सीबीआई और राजस्व खुफिया निदेशालय यानी डीआरआई ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। जांच एजेंसियों ने एक बड़े संयुक्त अभियान के तहत अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने देश के अलग अलग हिस्सों से तस्करी कर लाए गए तिरपन अत्यंत संरक्षित और दुर्लभ वन्यजीवों तथा पक्षियों को तस्करों के चंगुल से सुरक्षित छुड़ाने में सफलता हासिल की है। [1]

बड़ी गिरफ्तारी

इस पूरे सुरक्षा ऑपरेशन को वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी के मजबूत सहयोग से अंजाम दिया गया है। जांच टीम ने इस सिलसिले में पश्चिम बंगाल के कोलकाता और महाराष्ट्र के मुंबई से कुल छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक पकड़े गए अपराधियों की पहचान मुंबई निवासी नोमान खान, मोहम्मद फारूक और इन्शा शकील के रूप में हुई है, जबकि कोलकाता से सैकत बिस्वास, मिथुन मंडल उर्फ हिमांशु मंडल और अर्जुन मंडल को कानूनी हिरासत में लिया गया है।

बचाए गए जीवों में पंद्रह स्लो लोरिस, दो बिनटुरोंग, अट्ठाईस स्टार कछुए, छह मिस्र के गिद्ध और दो शिकरा पक्षी शामिल हैं। यह सभी वन्यजीव तस्करी गिरोह के चंगुल से छुड़ाए गए हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम उन्नीस सौ बहत्तर की अनुसूची एक के तहत भारत में पूरी तरह संरक्षित हैं। इस कानून के तहत इन सभी विशिष्ट और दुर्लभ प्रजातियों को देश के भीतर सर्वोच्च स्तर की कानूनी सुरक्षा और संरक्षण प्रदान किया गया है, ताकि इनका शिकार न हो।

कड़ी कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन जीवों में शामिल स्लो लोरिस और मिस्र के गिद्ध अत्यंत लुप्तप्राय श्रेणी में आते हैं। वहीं दूसरी ओर बिनटुरोंग और स्टार कछुए भी बेहद संवेदनशील प्रजातियों में सूचीबद्ध हैं। डीआरआई मुंबई को इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट के सक्रिय होने की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। इसके बाद ही वन्यजीव तस्करी गिरोह के इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ी जा सकी।

सीबीआई मुख्यालय ने इस पूरे मामले में सात और आठ जुलाई दो हजार छब्बीस को दो अलग अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज किए हैं। इन सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता दो हजार तेईस की आपराधिक साजिश रचने वाली सख्त धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया गया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इन सभी बेजुबान जीवों को देश के विभिन्न दूरदराज के जंगलों से अवैध व्यापार के लिए पकड़ा गया था।

विभाग को सुपुर्द

शुरुआती कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद, सुरक्षित बचाए गए इन सभी अनमोल पशु पक्षियों को आगे की उचित देखरेख के लिए महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के वन विभागों को सौंप दिया गया है। वन विभाग के अधिकारी अब इन जीवों को उनकी प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल माहौल में सुरक्षित छोड़ेंगे। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस वन्यजीव तस्करी गिरोह के पकड़े जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अवैध जीव व्यापार नेटवर्क के कई बड़े राज खुलेंगे।

आने वाले दिनों में पकड़े गए इन सभी आरोपियों से रिमांड के दौरान कड़ी पूछताछ की जाएगी, जिससे इस धंधे में शामिल अन्य बड़े सफेदपोश अपराधियों के चेहरों को बेनकाब किया जा सके। सरकार देश के भीतर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने के प्रति प्रतिबद्ध है। अधिकारियों ने आम जनता से भी अपील की है कि वे ऐसे वन्यजीव तस्करी गिरोह की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग को साझा करें।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। देश में सीबीआई और डीआरआई द्वारा वन्यजीव तस्करी गिरोह के खिलाफ की गई संयुक्त कार्रवाई, छह आरोपियों की गिरफ्तारी, दुर्लभ जीवों के रेस्क्यू और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के कानूनी प्रावधानों को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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