लैब टेक्नीशियन ने रक्तदान कर मासूम को नया जीवन दिया
अस्पताल के लैब टेक्नीशियन ने आपातकालीन स्थिति में दुर्लभ ब्लड देकर महज तीन दिन के मासूम को नया जीवन प्रदान कर मानवता की अनोखी मिसाल पेश की है।
लैब टेक्नीशियन ने आपात स्थिति में दिया रक्त
भीलवाड़ा, राजस्थान। शहर के राजकीय महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक में मानवता, सेवा और कर्तव्यपरायणता का एक बेहद अद्भुत प्रेरणादायी उदाहरण देखने को मिला है। अस्पताल के ब्लड बैंक में ही कार्यरत लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत ने आपातकालीन स्थिति में अपना दुर्लभ ओ नेगेटिव रक्तदान कर महज तीन दिन के मासूम को नया जीवन प्रदान किया। अस्पताल में भर्ती तीन दिन के उस नवजात शिशु की हालत काफी गंभीर थी और चिकित्सकों ने तत्काल ओ नेगेटिव ब्लड की अत्यंत आवश्यकता बताई थी।
दुर्लभ ब्लड ग्रुप
यह ब्लड ग्रुप अत्यंत दुर्लभ होने के कारण पीड़ित परिजनों के सामने अचानक एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। ऐसे नाजुक समय में सहयोग सेवार्थ फाउंडेशन की प्रेरणा से ब्लड बैंक में कार्यरत सजग लैब टेक्नीशियन मनोज प्रजापत बिना किसी विलंब के स्वयं रक्तदान के लिए आगे आए। मनोज प्रजापत का स्वयं का ब्लड ग्रुप भी ओ नेगेटिव है और उन्होंने तुरंत लाइव डोनेशन करते हुए ताजा रक्त उपलब्ध कराया जिससे उस मासूम को नया जीवन मिल सका।
उनकी इस त्वरित तत्परता और निस्वार्थ सेवा भावना से मासूम की जान बचाने में चिकित्सा टीम को महत्वपूर्ण सफलता मिली। उल्लेखनीय है कि मनोज प्रजापत का यह कोई पहला सेवा कार्य नहीं है। वे इससे पहले भी कई आपातकालीन परिस्थितियों में दुर्लभ रक्त की गंभीर आवश्यकता होने पर स्वयं रक्तदान कर अनेक मरीजों की जान बचा चुके हैं। अस्पताल परिसर में उन्हें जरूरतमंद मरीजों के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले रक्तदाता के रूप में जाना जाता है।
सराहनीय सेवा
महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक की यह वर्षों पुरानी गौरवशाली परंपरा रही है कि जब भी किसी मरीज के लिए दुर्लभ रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता तब ब्लड बैंक के चिकित्सक और कर्मचारी स्वयं आगे आकर लाइव डोनेशन के माध्यम से मरीजों की जान बचाने का प्रयास करते हैं। यही सेवा भावना अस्पताल की कार्यसंस्कृति को एक विशेष पहचान दिलाती है। इस रक्तदान के दौरान ब्लड बैंक में ड्यूटी पर अनेक वरिष्ठ चिकित्साकर्मी मौजूद थे।
ड्यूटी पर मौजूद डॉ धर्मवीर बेरवा, भागचंद सोनी, शिवम बंसल तथा महेश मीणा ने मनोज प्रजापत की इस निस्वार्थ सेवा भावना की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि समय पर किया गया रक्तदान किसी भी जरूरतमंद के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित होता है। नवजात शिशु के परिजनों ने भावुक होकर मनोज प्रजापत, ब्लड बैंक की पूरी टीम तथा सहयोग सेवार्थ फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया।
मददगार टीम
परिजनों ने कहा कि समय पर मिले इस रक्त ने उनके मासूम को नया जीवन दिया है जिसे वे जीवनभर कभी नहीं भूल पाएंगे। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि रक्तदान केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि किसी अनजान व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीद और नई सांसें भरने वाला सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। इस पुनीत कार्य की चर्चा अब पूरे चिकित्सा महकमे और सामाजिक क्षेत्रों में बड़े सम्मान के साथ की जा रही है।
ब्लड बैंक की इस त्वरित सक्रियता से अस्पताल प्रबंधन भी बेहद गद्गद नजर आ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवा पीढ़ी को इस घटना से प्रेरणा लेकर नियमित रूप से रक्तदान करने का संकल्प लेना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी जरूरतमंद को रक्त के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े। इस सफल जीवन रक्षक कार्य ने भीलवाड़ा शहर के सभी नागरिकों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन द्वारा किए गए दुर्लभ ओ नेगेटिव रक्तदान, नवजात शिशु के सफल उपचार और ब्लड बैंक की इस मानवीय गतिविधि को समझने के लिए यह सामग्री प्रस्तुत है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।