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राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम का शुद्धता से पालन करने के निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी सरकारी कार्यालयों और राजभवनों को राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।

By अजय त्यागी
1 min read
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India

नई दिल्ली, भारत। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश भर के सभी सरकारी विभागों, राज्यपालों और उपराज्यपालों के कार्यालयों को एक नया आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस नए निर्देश के तहत आधिकारिक समारोहों के दौरान राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को गाते या बजाते समय उनके निर्धारित पाठ, शब्द, उच्चारण और गायन शैली का पूरी शुद्धता के साथ पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन राष्ट्रीय प्रतीकों को हमेशा उचित सम्मान और पूर्ण सटीकता के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।   राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम

नियमों की सूची और प्रोटोकॉल

गृह मंत्रालय द्वारा नौ जुलाई को जारी किए गए इस आदेश में उन सभी अवसरों की एक विस्तृत सूची दी गई है, जहां राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम के तहत इनका गायन या वादन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इस दिशा-निर्देश के अनुसार नागरिक अलंकरण समारोहों, औपचारिक राजकीय कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के आगमन तथा प्रस्थान के समय राष्ट्रीय गीत का गायन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त जब भी राष्ट्रपति ऑल इंडिया रेडियो या टेलीविजन के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करेंगे, तब उनके संबोधन के ठीक पहले और बाद में इसे बजाया जाएगा।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित होने वाले औपचारिक सरकारी कार्यक्रमों में राज्यपालों या उपराज्यपालों के आगमन और विदाई के अवसर पर भी इसी प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि परेड के दौरान जब भी राष्ट्रीय ध्वज को लाया जाएगा, तब इन नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया को अपनाना होगा। गृह मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दोनों के सही पाठ और उच्चारण से संबंधित एक विस्तृत गाइड भी सभी संदर्भों के लिए उपलब्ध करा दी है। राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम

राज्यों के गीतों से जुड़े निर्देश

इस नए आदेश में गृह मंत्रालय ने उन राज्यों के लिए भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है जहां राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ-साथ राज्य गीत भी गाया या बजाया जाता है। आदेश में कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम के अनुसार इन दोनों को एक साथ ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इस संयुक्त प्रस्तुति के दौरान सबसे पहले राष्ट्रीय गीत गाया या बजाया जाएगा और उसके ठीक बाद ही राष्ट्रगान की प्रस्तुति शुरू की जाएगी।

इस साल केंद्र सरकार द्वारा 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है जिसके मद्देनजर इन नियमों को फिर से दोहराया गया है। पूर्व में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय गीत के छह छंदों वाले आधिकारिक संस्करण की अवधि लगभग तीन मिनट और दस सेकंड निर्धारित की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक समारोहों या सामूहिक गायन के दौरान भी यदि उचित मर्यादा, मातृभूमि के प्रति सम्मान और सही आचरण बनाए रखा जाता है, तो इसके गायन पर कोई आपत्ति नहीं है।

ऐतिहासिक महत्व और मर्यादा

संविधान सभा द्वारा चौबीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को अपनाए गए ऐतिहासिक संकल्प के तहत 'जन गण मन' को भारत के राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया गया था। स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गीत 'वंदे मातरम' को भी संविधान सभा द्वारा राष्ट्रगान के समान ही समान सम्मान और दर्जा दिया गया था। यही कारण है कि सरकारी कार्यक्रमों में इसके गायन के समय सभा में उपस्थित सभी व्यक्तियों के लिए सम्मानपूर्वक सावधान की मुद्रा में खड़े होना अनिवार्य है।

इस प्रकार इन नए निर्देशों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव के इन प्रतीकों के प्रस्तुतिकरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनादर को रोकना है। सरकार ने सभी प्रशासनिक प्रमुखों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि उनके अधीन आने वाले सभी आयोजनों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के नियम का अक्षरशः पालन हो। इन नियमों के लागू होने से भविष्य में होने वाले सभी राष्ट्रीय और राजकीय समारोहों में एकरूपता और गरिमा बनी रहेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट अधिकृत सरकारी अधिसूचनाओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सामान्य सूचना के प्रसार के उद्देश्य से किया गया है। पाठकों को ध्यान रखना चाहिए कि राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े प्रोटोकॉल एवं नियम समय-समय पर गृह मंत्रालय और सरकारी नीतियों के संशोधनों के अधीन होते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी आधिकारिक निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief