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आईएनएस महेंद्रगिरी के नौसेना में शामिल होने से समुद्री ताकत हुई दोगुनी

भारतीय नौसेना की ताकत में एक और ऐतिहासिक इजाफा करते हुए स्वदेशी आईएनएस महेंद्रगिरी को विशाखापत्तनम में देश को समर्पित कर दिया गया है।

By अजय त्यागी
1 min read
आईएनएस महेंद्रगिरी

आईएनएस महेंद्रगिरी

विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश। भारतीय नौसेना के बेड़े में शनिवार को आधुनिक तकनीकों से लैस छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट शामिल हो गया है। विशाखापत्तनम स्थित नेवल डॉकयार्ड में आयोजित एक भव्य कमीशनिंग सेरेमनी के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना का हिस्सा बनाया गया। प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार किए गए इस शक्तिशाली युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखला के नाम पर आईएनएस महेंद्रगिरी रखा गया है, जो दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। [1]

नौसेना की बढ़ी ताकत

इस नए फ्रिगेट के सेवा में आने के बाद भारतीय नौसेना के पास मौजूद मुख्य फ्रिगेट्स की कुल संख्या अब बढ़कर 20 हो गई है। रक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश के विभिन्न शिपयार्डों में 40 से अधिक जहाजों का निर्माण किया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आईएनएस महेंद्रगिरी का बेड़े में शामिल होना भारत की समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक कदम है।

इस युद्धपोत को नौसेना के अपने वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा पूरी तरह से डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। अत्याधुनिक रडार डिटेक्शन सिस्टम और उच्च स्तरीय ऑटोमेशन से लैस होने के कारण यह युद्धपोत दुश्मन की पकड़ में आए बिना समुद्र की सतह पर सभी प्रकार के नौसैनिक युद्ध संचालन करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके सुरक्षा तंत्र को इस तरह से विकसित किया गया है कि यह विपरीत परिस्थितियों में भी दुश्मन को करारा जवाब दे सके।

आंध्र प्रदेश बनेगा ड्रोन हब

कमीशनिंग समारोह के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में राज्य के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में आंध्र प्रदेश देश के सबसे बड़े ड्रोन हब के रूप में उभरेगा। उन्होंने पूर्व में कुरनूल में आठ ड्रोन कंपनियों के सहयोग से एक 'ड्रोन सिटी' स्थापित करने की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह बेंगलुरु को देश की 'सिलिकॉन वैली' कहा जाता है, उसी तरह यह क्षेत्र भी अपनी एक नई वैश्विक पहचान बनाएगा।

सुरक्षा परिदृश्य की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आसमान में एएमसीए, समुद्र की गहराई में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के नेवल सिस्टम, थल पर उन्नत तकनीकें और अब सतह पर आईएनएस महेंद्रगिरी भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि राज्य हवा, पानी और जमीन हर मोर्चे पर देश की सीमाओं को सुरक्षित करने में अपना अमूल्य योगदान दे रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने स्थानीय प्रशासन और क्षेत्र के नागरिकों को बधाई भी दी।

आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वदेशी युद्धपोत के नौसेना में आने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ और अधिक मजबूत होगी। पूरी तरह से देश में निर्मित होने के कारण यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी प्रदर्शित करता है। युद्धपोत में लगाई गई उन्नत स्टील्थ तकनीक इसके रडार क्रॉस-सेक्शन को बेहद कम कर देती है, जिससे यह दुश्मन के रडार की नजरों से बचकर सटीक हमला करने में सक्षम हो जाता है।

नौसेना के वरिष्ठ कमांडरों ने बताया कि आने वाले दिनों में आईएनएस महेंद्रगिरी को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। यह युद्धपोत पनडुब्बी रोधी अभियानों के साथ-साथ हवाई हमलों से निपटने की आधुनिक प्रणालियों से भी लैस है। इस सफल कमीशनिंग के साथ ही भारतीय रक्षा उद्योग ने जटिल और विशाल श्रेणी के युद्धपोतों के निर्माण में अपनी वैश्विक श्रेष्ठता और तकनीकी दक्षता को एक बार फिर दुनिया के सामने साबित कर दिया है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना और आधिकारिक समाचार एजेंसियों से प्राप्त प्राथमिक तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सामान्य सूचना और जन-जागरूकता के उद्देश्य से किया गया है। सैन्य उपकरणों की तकनीकी विशिष्टताएं और युद्धपोतों की रणनीतिक तैनाती रक्षा मंत्रालय के गोपनीय सुरक्षा मानकों तथा आधिकारिक नीतियों के अंतर्गत आती है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
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