दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में होगी प्रकाशित
एसएमएस अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मरीज की बेहद दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करके नया जीवन दिया है जिसकी चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है।
मरीज जिसकी सर्जरी की गई थी
जयपुर, राजस्थान। सवाई मानसिंह अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए अट्ठावन वर्षीय मरीज को नया जीवन दिया है। अस्पताल के अनुभवी चिकित्सकों ने हार्ट अटैक के बाद मरीज के हृदय के बाएं निलय यानी लेफ्ट वेंट्रिकल में बनी करीब तेरह दशमलव चार गुणा ग्यारह दशमलव पांच सेंटीमीटर आकार की विशाल गुब्बारेनुमा थैली को सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। इस ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने हृदय का दोबारा पुनर्निर्माण भी किया है। [1]
विदेश में आया हार्ट अटैक
इस दुर्लभ और जटिल हृदय सर्जरी को अब अंतरराष्ट्रीय जर्नल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी में प्रकाशन के लिए भी स्वीकार किया गया है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ संजीव देवगढ़ा ने बताया कि झुंझुनूं निवासी अट्ठावन वर्षीय श्रीराम सहाय लीबिया यानी उत्तर अफ्रीका में कार्यरत थे। वहां उन्हें अचानक गंभीर हार्ट अटैक आया था जिसके बाद स्थानीय अस्पताल में एंजियोप्लास्टी कर दो स्टेंट लगाए गए थे। वहां के डॉक्टरों ने उन्हें आगे बड़े ऑपरेशन की मुख्य सलाह दी थी।
इसके बाद वह भारत लौटे और उन्होंने जयपुर के एसएमएस अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया। उस समय मरीज को लगातार सीने में तेज दर्द और सांस लेने में बहुत गंभीर परेशानी हो रही थी। डॉक्टरों ने मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए तुरंत जांच प्रक्रिया शुरू की थी। इस तरह की स्थिति में मरीज की जान को हर समय बहुत बड़ा खतरा बना रहता है जिसके लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता बहुत जरूरी मानी जाती है।
पांच घंटे चला ऑपरेशन
मरीज की इकोकार्डियोग्राफी और सीटी स्कैन जांच में पता चला कि हार्ट अटैक के कारण हृदय के बाएं निलय की दीवार में विशाल एन्यूरिज्म बन चुका था। मरीज को सत्ताईस मई दो हजार छब्बीस को ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसके बाद पांच जून दो हजार छब्बीस को चिकित्सकों की टीम ने करीब पांच घंटे तक चले अत्यंत जटिल ऑपरेशन में मरीज को हार्ट लंग मशीन पर रखकर इस जटिल हृदय सर्जरी की प्रक्रिया को सफलता से पूरा किया था।
ऑपरेशन के दौरान हृदय के प्रभावित हिस्से से विशाल एन्यूरिज्म को बेहद सावधानीपूर्वक हटाया गया और हृदय की प्राकृतिक संरचना एवं कार्यक्षमता को सुरक्षित रखते हुए उसका पुनर्निर्माण किया गया। इस पूरी सर्जरी के दौरान मरीज को सात यूनिट रक्त की आवश्यकता पड़ी थी। मरीज के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होने पर दस जून दो हजार छब्बीस को उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल से पूरी तरह से छुट्टी दे दी गई थी।
वैश्विक स्तर पर सराहना
डॉ संजीव देवगढ़ा ने बताया कि लगभग तेरह गुणा ग्यारह दशमलव पांच सेंटीमीटर आकार के लेफ्ट वेंट्रिकुलर एन्यूरिज्म के सफल ऑपरेशन दुनिया भर में बेहद कम दर्ज हैं। हृदय की प्राकृतिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए किए गए इस सफल पुनर्निर्माण के कारण यह पूरा केस विशेष चिकित्सा महत्व रखता है। इसी बड़ी उपलब्धि को देखते हुए इस केस स्टडी को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रमुखता से प्रकाशन के लिए सहर्ष स्वीकार किया गया है।
इस जटिल हृदय सर्जरी का सफल नेतृत्व वरिष्ठ प्रोफेसर एवं इकाई प्रभारी डॉ संजीव देवगढ़ा ने किया था। उनकी टीम में डॉ अनुला सिसोदिया डॉ के के मावर डॉ ध्रुव शर्मा डॉ उत्सव नंदवाना डॉ स्वप्निल पंचाल और डॉ मोहित सिंघल शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ रीमा मीणा डॉ अंजुम खान डॉ अधोक्षज जोशी और डॉ अरुण गर्ग ने सेवाएं दीं जबकि नर्सिंग टीम में कंचन चौधरी तथा परफ्यूजनिस्ट के रूप में पुलकित आचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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