WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

नए नियमों के विरोध में तीसरे दिन भी जारी रही ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल

ट्रैकिंग डिवाइस और नए ई चालान नियमों के विरोध में प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल लगातार तीसरे दिन भी जारी रही।

By अजय त्यागी
1 min read
ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल

ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल

जयपुर, राजस्थान। प्रदेश में नए नियमों और ट्रैकिंग व्यवस्था के विरोध में व्यवसायियों का अनिश्चितकालीन चक्का जाम तीसरे दिन भी पूरी तरह जारी रहा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, परमिट और ई डिटेक्शन चालान को लेकर प्रदेश भर में यह बड़ा आंदोलन छिड़ा हुआ है। रविवार रात से ही ट्रक मालिक और ट्रांसपोर्ट कारोबारी अपने वाहनों को रोककर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस चक्का जाम के कारण पूरे प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ने लगा है और ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल लगातार गंभीर होती जा रही है। [1]

व्यापारियों का पक्ष

इस आंदोलन को लेकर जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी गुलशन नागपाल ने बताया कि यह कदम उन्होंने बहुत परेशान होकर उठाया है। कारोबारियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और जब तक विभाग इन पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता, तब तक ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल जारी रहेगी। मुख्य विवाद व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस को अनिवार्य करने से जुड़ा हुआ है। व्यापारी इसे लगाने का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि वे चाहते हैं कि सरकार उन्हें इस नई व्यवस्था को अपनाने के लिए कुछ अतिरिक्त समय दे।

कारोबारियों का आरोप है कि सरकार ने नियम तो लागू कर दिए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इसके लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। पर्याप्त फिटमेंट सेंटर और डिवाइस की कमी के कारण ट्रक मालिकों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि चक्का जाम करना हमेशा आखिरी कदम होता है और व्यवस्था सुचारू न होने के कारण ही मजबूरी में उन्हें यह रास्ता चुनना पड़ा है।

सरकारी विभाग का रुख

इस पूरे बड़े विवाद के बाद राजस्थान परिवहन विभाग ने भी व्यवस्था में बड़े बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई एसओपी का एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त विभाग के पास भेज दिया गया है। इस नए बदलाव के लागू होने के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अधिकृत एक सौ अठहत्तर कंपनियां प्रदेश में यह डिवाइस लगा सकेंगी।

वर्तमान में प्रदेश में केवल सत्रह कंपनियां ही इस कार्य को कर रही हैं जिसके कारण काम की गति बहुत धीमी थी। अब नई नीति के तहत सभी कंपनियों को प्रदेश में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए कंपनियों को एक लाख रुपए का नॉन रिफंडेबल शुल्क और प्रति डिवाइस एक हजार रुपए प्रोसेसिंग फीस देनी होगी। इसके साथ ही प्रत्येक कंपनी के लिए राजस्थान में अपना मुख्य कार्यालय या आधिकारिक फिटमेंट सेंटर खोलना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।

निगरानी और कार्रवाई

परिवहन विभाग ने नई नीति में उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। यदि कोई कंपनी खराब सेवा देती है या उसके खिलाफ लगातार शिकायतें मिलती हैं, तो विभाग के अधिकारियों के पास उसका पंजीकरण तुरंत निरस्त करने का अधिकार होगा। इस पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी के लिए एक विशेष नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई बड़ी परेशानी खड़ी न हो और ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल को भी जल्द समाप्त कराया जा सके।

इस नए प्रशासनिक बदलाव से सरकार को उम्मीद है कि बाजार में कंपनियों की संख्या बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और डिवाइस आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। दूसरी तरफ व्यापारी अभी भी इस बात पर अड़े हैं कि जब तक लिखित में समय सीमा बढ़ाने और चालान रोकने का आदेश नहीं आता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दोनों पक्षों के बीच इस गतिरोध के कारण व्यापारिक जगत में भारी चिंता का माहौल बना हुआ है क्योंकि ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से आम जनता की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। यह रिपोर्ट राजस्थान में परिवहन विभाग के नए वीएलटीडी नियमों के विरोध और ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से संबंधित है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief
Source Source