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त्रिभाषा काव्य गोष्ठी में हिंदी उर्दू और राजस्थानी का संगम

त्रिभाषा काव्य गोष्ठी में हिंदी उर्दू और राजस्थानी भाषाओं का अनूठा संगम देखने को मिला जहाँ साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

By अजय त्यागी
1 min read
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अपनी रचना प्रस्तुत करते डॉ बिनानी

अपनी रचना प्रस्तुत करते डॉ बिनानी

बीकानेर, राजस्थान। पर्यटन लेखक संघ एवं महफिले-अदब के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को गंगाशहर रोड स्थित होटल मरुधर हेरिटेज में साप्ताहिक त्रिभाषा काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस साहित्यिक कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध शायर इमदाद उल्लाह बासित उपस्थित रहे। गोष्ठी के संयोजक डॉ. जिया उल हसन कादरी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी का स्वागत किया। इस गरिमापूर्ण आयोजन में तीनों भाषाओं के वरिष्ठ रचनाकारों ने अपनी बेहतरीन कविताओं और गजलों के माध्यम से आपसी प्रेम, भाईचारे और देश की सांस्कृतिक एकता का अनूठा संदेश दिया।

साहित्यिक संगम

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने अपने संबोधन में कहा कि कोई भी भाषा किसी भी समाज के साहित्य का मूल आधार होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक साहित्यकार केवल साधारण रचनाकार नहीं होता बल्कि वह विभिन्न भाषाओं को समृद्ध करने की बड़ी जिम्मेदारी निभाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने त्रिभाषा काव्य गोष्ठी की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच हिंदी, उर्दू और राजस्थानी तीनों भाषाओं को एक साथ लेकर चल रहा है जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। भाषा के अभाव में किसी भी उच्चकोटि के साहित्य की कल्पना तक नहीं की जा सकती क्योंकि भाषा ही पाठक और रचनाकार के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है।

इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ. बिनानी ने अपनी सुरीली रचना सबको यही संदेश देना प्रेम-प्रीत बनाए रखना प्रस्तुत कर श्रोताओं को पूरी तरह भावविभोर कर दिया। गोष्ठी के मुख्य अतिथि शायर इमदाद उल्लाह बासित ने अपने अंदाज में तेरे दीदार की ख्वाहिश लिए दीवाना तेरा पेश कर महफिल में एक अलग ही रंग जमा दिया। कार्यक्रम के प्रारंभ में राजस्थान उर्दू अकादमी के पूर्व सदस्य असद अली असद ने इस साप्ताहिक गोष्ठी के पिछले चौदह वर्षों के लंबे और सफल सफर की संक्षिप्त जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने अपनी बेहतरीन रचना मोहब्बत का बयां उसकी ज़बां से पेश कर गोष्ठी में मौजूद सभी लोगों की जमकर दाद और वाहवाही लूटी।

शायरी का दौर

वरिष्ठ शायर डॉ. जिया उल हसन कादरी ने अपनी प्रभावशाली रचना उसे फ़िरऔन का लाशा दिखाओ प्रस्तुत कर श्रोताओं की जोरदार तालियां बटोरी। उन्होंने ही इस पूरी त्रिभाषा काव्य गोष्ठी का बहुत ही कुशल और सराहनीय संचालन किया जिससे कार्यक्रम का प्रवाह लगातार बना रहा। गोष्ठी के दौरान शहर और आसपास के क्षेत्रों से आए कई प्रतिष्ठित रचनाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इनमें वरिष्ठ शायर शकील गौरी, वल मोहम्मद गौरी वली, कासिम बीकानेरी और देशनोक से विशेष रूप से पधारे महबूब देशनोकवी शामिल रहे। इन सभी रचनाकारों ने अपनी बहुआयामी और समसामयिक रचनाओं से उपस्थित श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया और आयोजन को यादगार बना दिया।

इसके अतिरिक्त वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश दान बारठ, धर्मेंद्र राठौड़ और अमर जुनूनी सहित कई अन्य गणमान्य रचनाकारों ने भी अपनी चुनिंदा प्रस्तुतियां दीं। इन सभी कवियों और शायरों की कविताओं ने महफिल में चार चांद लगा दिए तथा श्रोताओं ने हर प्रस्तुति पर मुक्तकंठ से प्रशंसा की। साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी के रचनाकारों को भी एक बहुत बड़ा और सकारात्मक मंच प्राप्त होता है। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के सांस्कृतिक प्रयास भविष्य में भी निरंतर जारी रहने चाहिए ताकि हमारी क्षेत्रीय और मुख्यधारा की भाषाएं हमेशा जीवित और ऊर्जावान बनी रहें।

सांस्कृतिक एकता

कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी वक्ताओं और उपस्थित अतिथियों ने इस बात पर सहमति जताई कि त्रिभाषा का यह प्रयोग सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में बेहद मददगार साबित हो रहा है। इस प्रकार की साहित्यिक गोष्ठियाँ न केवल भाषा प्रेमियों को एक छत के नीचे लाती हैं बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देती हैं। अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए युवा साहित्य प्रेमी जुकरनेन ने आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद किया। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बीकानेर की धरती साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजनों के मामले में हमेशा से बेहद समृद्ध और अग्रणी रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। त्रिभाषा काव्य गोष्ठी और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ी यह जानकारी सामान्य जनहित और साहित्यिक अपडेट के लिए है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief