बच्चों का बुखार हर बार संक्रमण नहीं, सही पहचान से बच सकती है जान
बच्चों का बुखार हमेशा संक्रमण नहीं होता। पुष्कर के चिकित्सा सम्मेलन में डॉ. जी.एस. तंवर ने कावासाकी रोग की पहचान और एंटीबायोटिक के सही इस्तेमाल पर जोर दिया।
गोल्डन जुबली राजपेडिकॉन
बीकानेर/पुष्कर, राजस्थान। बच्चों में लगातार बुखार को हर बार संक्रमण मानकर एंटीबायोटिक शुरू करना सही इलाज नहीं है। इसके पीछे प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी बीमारियां, गठिया और अन्य सूजन संबंधी रोग, रक्त तथा अस्थि मज्जा की बीमारियां या दवाओं से होने वाली प्रतिक्रिया भी हो सकती है। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. जी.एस. तंवर ने पुष्कर में गोल्डन जुबली राजपेडिकॉन और नॉर्थ जोन पेडिकॉन 2026 के दौरान केस आधारित पैनल चर्चा का संचालन किया। सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित हुआ। [Video]
चर्चा का मुद्दा
डॉ. तंवर ने पीबीएम अस्पताल, बीकानेर में अपने कार्यकाल के दौरान सामने आए जटिल मामलों के जरिए बताया कि कई गंभीर बीमारियां शुरुआती चरण में संक्रमण जैसी दिखाई देती हैं। इसलिए बच्चों का बुखार होने पर केवल संक्रमण की आशंका के आधार पर उपचार तय करना पर्याप्त नहीं है। बच्चे के लक्षण, शारीरिक परीक्षण, बीमारी का इतिहास और जांच रिपोर्ट एक साथ देखकर निष्कर्ष निकालना जरूरी है। चर्चा में कावासाकी रोग, रक्त और अस्थि मज्जा से जुड़ी बीमारियां, प्रतिरक्षा तथा सूजन संबंधी रोग और दवाओं से होने वाले बुखार के मामलों को शामिल किया गया।
कावासाकी संकेत
प्रस्तुति में ऐसे बच्चे का मामला सामने रखा गया, जिसे कई दिनों से तेज बुखार था। उसकी आंखें लाल थीं, शरीर पर चकत्ते थे, होंठों में बदलाव था और हाथ पैरों में सूजन दिखाई दे रही थी। शुरुआत में संक्रमण मानकर इलाज किया गया, लेकिन बुखार कम नहीं हुआ। विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद कावासाकी रोग की पहचान हुई। यह बीमारी हृदय की रक्त वाहिकाओं, खासकर कोरोनरी धमनियों को नुकसान पहुंचा सकती है। बच्चों का बुखार इन लक्षणों के साथ बना रहे, तो समय पर विशेषज्ञ जांच और सही उपचार बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
खतरे के संकेत
डॉ. तंवर ने लगातार बुखार और उपचार के बावजूद सुधार नहीं होने को दोबारा चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत से जोड़ा। आंखों में लालिमा, त्वचा पर चकत्ते, होंठों में असामान्य बदलाव या हाथ पैरों में सूजन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कावासाकी रोग में समय पर पहचान से हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम घटाने में मदद मिल सकती है। बच्चों का बुखार अपने आप में बीमारी का नाम नहीं, बल्कि किसी समस्या का लक्षण है। इसलिए चिकित्सकों को बच्चे की पूरी स्थिति का आकलन कर संभावित कारणों के अनुरूप जांच और उपचार तय करना चाहिए।
दवा का विवेक
चर्चा में एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। ये दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में उपयोगी हैं, लेकिन वायरस के खिलाफ सामान्यतः असरदार नहीं होतीं। जब बुखार का कारण गैर संक्रामक बीमारी हो, तब बार बार एंटीबायोटिक बदलने से मूल समस्या दूर नहीं होती। सही निदान के लिए विस्तृत चिकित्सकीय इतिहास, बार बार परीक्षण और जरूरत के अनुसार लक्षित जांच जरूरी हैं। बच्चों का बुखार देखकर बिना कारण स्पष्ट किए दवा देना अनावश्यक उपचार, दुष्प्रभाव और एंटीबायोटिक प्रतिरोध का खतरा बढ़ा सकता है। इससे इलाज की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञ सम्मान
सम्मेलन में बीकानेर के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों ने विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में भाग लिया और सत्रों की अध्यक्षता की। इनमें डॉ. पी.सी. खत्री, डॉ. महेश शर्मा, डॉ. चंद्र कुमार चहार, डॉ. श्याम अग्रवाल, डॉ. मुकेश बेनीवाल, डॉ. पवन दारा, डॉ. संतोष चांडक, डॉ. गौरव पारीक और डॉ. धीरज शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे। डॉ. नरेंद्र पारीक ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। इसी अवसर पर पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्र कुमार चहार को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान बाल चिकित्सा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए दिया गया।
शोध में सफलता
सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों ने सम्मेलन में शोध और वैज्ञानिक प्रस्तुतियों के जरिए भागीदारी दर्ज कराई। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, बीकानेर के रेजिडेंट डॉक्टरों ने कुल 12 शोध पत्र प्रस्तुत किए। नवजात शिशु चिकित्सा के पुरस्कार सत्र में डॉ. दीपिका चौधरी ने प्रथम स्थान और डॉ. हर्षित रावल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सम्मेलन में चिकित्सकीय शिक्षा, शोध और बाल स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बच्चों का बुखार लगातार बना रहे या उसके साथ असामान्य लक्षण दिखें, तो कारण की पहचान और उचित उपचार के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट प्रेस विज्ञप्ति से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।